रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंटी०-रामचंद्र सुग्रीवको रंक कहे दरिद्री ते राजा कीन्हो सुग्रीव पदको
संबंध रंक राज पदहूंमेंहै विरद पदवी ॥ ६ ॥ प्रवर्षण नामा जो अद्रि
पर्वत है तामें जाइ वास करचो ॥ ७ ॥ रामचंद्र कैसो पर्वत देखंत भये कि
फूल हैं वरन बहु कहे अनेक रंगके औ बहुत फलन सों फरे बहुपदको संबंध
फलन हूं में हैं आगे श्लेषोत्प्रेक्षाकरि वर्णत हैं शरभवानर नाम विशेष हैं औ पशु-
जाति विशेष ॥ "शरभस्तु पशौ भिंदिकरमेवानरेभिदि इति मेदिनी" । ऋक्ष
पर्वतहूमें है सुग्रीवहूके संग जाम्बवंतादि हैं केशरी कहे सिंह ताके गण समूह औ
केशरी नामा वानर हनूमान के पिता तिनके गण सैन्य समूह शिवा पार्वती औ
शृगाली गजमुख गणेश औ हस्ती आदि और वनजीव आदि पदते गैंडा आदि
जानौं पर कहे बडे जे भृतसेवक हैं नंदिकेश्वरादि औ कोकेलचंद्रक चंद्रमा औ
कपूर अर्थ कदली वृक्षनमें कपूर होतहै ते कदली जामें बहुत हैं अथवा जल अनेक
वाप्यादिकनमें भरचो है अथ चंद्रक धर मोर ॥ "चंद्रः कर्पूरको कांपिल्य
सुवर्णवारिषु इति मेदिनी" । दिगंबरनग्नदुवौपच्छमेंएकैहै अहिराज वासुकी औ
बडे सर्प ॥ ८ ॥
मू०-तोमरछंद ॥ शिशुसोलसैसंगधाइ । बनमालज्योंसुर
राइ ॥ अहिराजसोयहिकाल । बहुशीशशोभनिमाल ॥ ९ ॥
स्वागताछंद ॥ चंद्रमंदद्युतिवासरदेखौ । भूमिहीनभुवपालवि-
शेषौ ॥ मित्रदेखियहशोभतहैनौं । राजसाजबिनुसीतहिहौं
ज्यौं ॥ १० ॥ दोहा ॥ पतिनीपतिबिनुदीनअति, पतिपति
नीबिनुमंद ॥ चंद्रबिनाज्योंयामिनी, ज्योंबिनयामिनिचंद ॥
॥ ११ ॥ स्वागताछंद ॥ देखिरामबरषाऋतुआई । रोमरो-
मबहुधादुखदाई ॥ आसपास तमकीछबिछाई रातिदिवसकछु-
जानिनजाई ॥ १२ ॥ मंदमंद धुनिसोंघनगाजैं । तुरतार-
जनुआवझबाजैं ॥ ठौरठौरचपलाचमकैक्यों । इंद्रलोकतियना-
चतिहैंज्यौं ॥ १३ ॥ मोटनकछंद ॥ सौहैंघनश्यामलघोर
घनैं । मोहैंतिनमैं बकपांतिमनैं ॥ शंखावलि पी बहुधाजल-
सों । मानीतिनकोउगिलैबलसों ॥ १४ ॥ शोभा अतिशक्र-