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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 130, कुल 269 में से

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पृष्ठ 130

( १२४ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
मू०-॥ यातेरेहेप्रकाशमें, बालिवध्योकपिराज ॥ वर्णनवर्षा
शरदको, उदधिउलंघनसाज ॥ १ ॥ पद्धटिकाछंद ॥ रविपु-
त्रबालिसों होतयुद्ध । रघुनाथभयेमनमाहँक्रुद्ध ॥ शरएकहन्यो-
उरमित्रकाम ॥ तबभूमिगिरयोकहिरामराम ॥ २ ॥ कछुचेत-
भयेतेहिबलनिधान ॥ रघुनाथविलोकेहाथबान ॥ शुभचीरज-
टाशिरश्यामगात । वनमालहियेउरविप्रलात ॥ ३ ॥ वालि ॥
तुम आदिमध्यअवशानएक । जगमोहतहौवपुधरिअनेक ॥
तुमसदाशुद्धसबकोसमान। केहिहेतुहत्योकरुणानिधान ॥४॥
राम ॥ सुनिवासवसुतबृधिबलविधान । मैंशरणागतहितहते-
प्रान ॥ यहसांटोलैकृष्णावतार । तबह्वैहौतुम संसारपार ॥ ५॥
टी०-॥ १॥ मित्र जे सुग्रीवह्रैं तिनके काम कहे अर्थ बालिके वधमें केवल सुग्रीवही
को हित है रामचंद्रको कछु हित नहीं है॥२॥३॥जगको आदि कहे उत्पत्ति मध्य
कहे प्रतिपाल अवसान कहे संसार कर्त्ता एक तुमही हौ अर्थ ब्रह्मारूप है तुम्हीं सृष्टि
करते हो विष्णु रूप है प्रतिपाल करत हौ रुद्र रूप है संहार करतहौ सो अनेक
वपुशरीर धरिकै जगको मोहत हौ अर्थ दशरथके पुत्र रामचन्द्र हैं इत्यादि मोह
बढावत हौ ॥ ४ ॥ सांटो कहे बदलो ॥ ५ ॥
मू०-रघुवीररंकतेराजकीन । युवराजबिरदअंगदहिदीन ॥
तबकिष्किंधातारासमेत ॥ सुग्रीवगयेअपनेनिकेत ॥ ६ ॥
दोहा ॥ कियोनृपतिसुग्रीवहति, बालिबलीरणधीर । गयेप्रव-
र्षण अद्रिको, लक्ष्मणश्रीरघुवीर ॥ ७ ॥ त्रिभंगीछंद ॥ देख्यो-
शुभ गिरिवरसकलसोभधरफूलबरनबहुफलनिफरे । संगसर-
भऋक्षजन केशरिकेगणमनहुधरणिसुग्रीवधरे॥सँग शिवाविरा-
जैगजमुख गाजैपरवभूतेलैचित्तहरे। शिरशुभचन्द्रकधरपरम-
दिगंबरमानो हरअहिराजधरे ॥ ८ ॥