रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ११६ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।
कहिके मृग मरयो है सो हमारो शब्दजानि ताही स्वरके मार्ग ह्वै हमारे बडे
हितसों बनके मध्यमें गई है कि हे लक्ष्मण ! यह पर्णकुटी है कि कछू औरई वस्तु
है औ कि वह पर्णकुटी नहीं है और ई पर्णकुटी है ॥ २५ ॥
मू०-दोधकछन्द॥ धीरजसोंअपनोमनरोक्यो । गीधजटायु
पर्योअवलोक्यो ॥ छत्रध्वजारथदेखिकैबूझैउ । गीधकहौरण
कौनसोजूझेउ ॥ २६ ॥ जटायु ॥ रावणलैगयोराघवसीता ।
हारघुनाथरटैशुभगीता ॥ मैंबिनछत्रध्वजारथकीन्हों । ह्वैगयो
हौंवलपक्षविहीनो ॥२७॥ मैंजगमेंसबतेबडभागी । देहदशा
तबकारणलागी ॥ जो बहुभांतिनवेदनगायो।रूपसोंमैंअवलो-
कनपायो ॥२८॥ राम ॥ साधुजटायुसदाबडभागी । तोमन-
मोवपुसोंअनुरागी ॥ छूट्योशरीरसुनीयहबानी । रामहिमेंतब
ज्योतिसमानी ॥ २९ ॥ तोटकछंद ॥ दिशिदक्षिणकोकरिदा-
हचले । सरितागिरिदेखतवृक्षभले ॥ बनअंधकवंधबिलोकत
हीं। दोउसोदरखैंचलियेतबहीं ॥३०॥ जबखैवेहिकोजियबुद्धि
गुनी । दुहुँबाणनिलैदोउबाहिहनी॥वहँछाडिकैदेहचल्योजवहीं
यहव्योममेंबातकह्योतबहीं ॥ ३१ ॥ तोटकछंद ॥ पीछे
मधवामोहिंशापदई । गंधर्वतेराक्षसदेहभई॥ फिरिकैमघवास-
ह्युद्धभयो । उनकोधकैशीशमेंवज्रहयो ॥ ३२ ॥
टी०-॥२६ ॥ २७ ॥ दशा अवस्था अर्थ यह कि यह देह गृध्रकी औ यह
वृद्धावस्था तुम्हारे कछू उपकारके लायक नहीं रही तासों तुम्हारोउपकार भयो
औ ऐसो जो तुम्हारो रूप है ताकों देख्यो तासों जगमें मैं सबसों बडभागी
हौं ॥ २८ ॥ अर्थ सायुज्य मुक्ति पायो ॥ २९ ॥ ३० ॥ ३१॥ बाहु दई पर्यन्त
तीनिछंदके क्षेपकहैं पीछेकहे पूर्वहीं ॥ ३२ ॥
मू०-दोहा ॥ गयोशीशगडिपेटमें, पर्योधरणिपरआय ॥
कछुकरुणाजियमोंभई, दीन्हीबाहुबढ़ाय॥३३॥बाहुदई द्वैको-