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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 118, कुल 269 में से

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पृष्ठ 118

( ११२ ) रामचंद्रिका-सटीक ।
खासुरवातसबैसूनि । उठिरावणगोमारीचजहाँमुनि ॥ ४ ॥
मनोरमाछंद ॥ रावणबात कहीसिगरीत्यों । शूर्पणखाहिंविरूप
करीज्यौं ॥ एकहिरामअनेक संहारे । दूषणस्यौंत्रिशिराखर
मारे ॥ ५ ॥ तूअबहोहिसहायकमेरो । हौंबहुतैगुणमानिहौँते-
रो ॥ जोहंरिसीतहिल्यावनपैहौं । वैभ्रमिकोकनहींमरिहैंहैं॥६॥
मारीच ॥ रामहिंमानुपकै जनिजानो । पूरणचौदहलोकबखा-
नो ॥ जाहुँजहाँतिय लैसुनदेखो । हौंहारिकोजलहूँथललेखो॥७॥
टी०-रामचन्द्रकी आज्ञासों लक्ष्मण सीताको लैके गुफामें राख्यो है यह
कथा शेष जानो ॥ २ ॥ वृष राशिके रवि जे शेखर कहे तृणके दूषण होत है
सुखाइ डारत हैं तैसे रविके कुलके पूषण जे रामचन्द्र हैं तिन खर औ दूषण
नाम राक्षस को दूरि कियो कहे मारयो औ गेद शत्रु जो वैद्य है सो जैसे त्रिदोष
कहे कफ पित्त वात तीनोंको दोष एकही बार दूरि करत हैं तैसे रघुनंदनके शर
त्रिशिराके शिरनको एकही बार दूर करयों ॥ ३ ॥ ४ ॥ स्यों कहे सहित ॥५॥
सीताको ढूंढत भूतलमें भ्रमि कहे भूमिकै अथवा संदेहमो प्राप्त व्हैकै ॥ ६ ॥
चौदहों लोकमें पूर्ण कहे व्याप्त ॥ ७ ॥
मू०-रावण-सुन्दरीछंद ॥ तूअबमोहि सिखावत हैशठ । मैं
वशजगतकियोहठहीहठ ॥ बेगिचलेअबदेहिनऊतरु । देव
सबैजएकनहींहरु ॥ ८ ॥ दोहा ॥ याचिचल्योमारीचमन,
मरणदुहूँविधिआसु ॥ रावणकेकरनरकहै, हरिकरहरिपुरबासु॥
॥ ९ ॥ राम-सुंदरीछंद ॥ राजसुताइकमंत्रसुनोअब । चाहत
हौंभवभारहरेउसब ॥ पावकमेंनिजदेहहिंराखहु । छायशरीर
मृगहिअभिलाषहु ॥ १० ॥ चामरछंद ॥ आइयो कुरंगएक
चारुहेमहीरको । जानकी समेतचित्तमोहि रामवीरको ॥ राज
पुत्रिकासमीपसाधुबंधुंराखिकै। हाथचापबाण लैगयेगिरीशनां-
१ सूर्य्य. २ रोग.