रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमू०-मल्लिकाछंद॥ हासकेबिलासजानि। दीहमानखंडमा-
नि ॥ भक्षिबेकोचित्तचाहि। सामुहेभईसियाहि ॥ ४० ॥ तो
मरछंद ॥ तबरामचन्द्रप्रवीन । हँसिबंधुत्यौंहगदीन ॥ गुनि-
दुष्टता सहलीन । श्रुतिनासिकाबिनुकीन ॥ ४१ ॥ दोहा-
शोन छिंछिछूटतबदन, भीमभईतेहिकाल ॥ मानोकृत्याकुटि-
लयुत, पावकज्वालकराल ॥ ४२ ॥
इति श्रीमत्सकलो कलोचनचकोरचिन्तामणि-श्रीरामचन्द्रचन्द्रिकायामिंद्रजि-
द्विरचितायां शूर्पणखाश्रवणनासिकाछेदनं नामैकादशः प्रकाशः ॥११॥
टी०-जब जान्यौ कि ये मोसों रमिहैं नहीं केवल मोसों हासके बिलास उप-
हास करत हैं तब दीह कहे बडो आपनो मानखंड कहे अपमान मानिकै॥ ४०॥
॥ ४१ ॥ कराल पावक ज्वाल-सों युक्त है वदनजाको ऐसी मानो कृत्यानामा
देवी है ॥ “कृत्याक्रियादेवतयोगितिमेदिनी” ॥ ४२ ॥
इति श्रीमज्जगज्जननीजनकजानकीजानकीजानिप्रसादाय जनजानकीप्रसाद
निर्मितायां रामभक्तिप्रकाशिकायामेकादशः प्रकाशः ॥ ११ ॥
मू०-दोहा ॥ या द्वादशे प्रकाशखर, दूषण त्रिशिरानाश ॥
सीताहरणविलाप सु,-ग्रीवमिलन हरि त्रास ॥ १ ॥
टी०-त्रासजो भय है ताको हरिकै सुग्रीवको मिलन हैं अर्थ बालिको वध
निश्चय करि सुग्रीवको त्रास हरि रामचन्द्रमित्रता करि हैं ॥ १ ॥
मू०-तोटकछंद ॥ गइशूर्पणखाखरदूषणपै । सजिल्याइति-
न्हैंजगभूषणपै ॥ शरएकअनेकतेदूरिकिये । रविकेकरज्यौंत-
मपुंजपिये ॥ २ ॥ मनोरमाछंद ॥ वृषकेश्वरदूषणज्यौंखरदू-
षण । तबदूरिकियेरविकेकुलभूषण ॥ गदशत्रुत्रिदोषज्यौंदूरि
करैवर । त्रिशिराशिरत्यौंरघुनंदनकेशर ॥ ३ ॥ भजिशूर्पण-
खागइरावणपैतब । त्रिशिराखरदूषणनाशकहेसब॥ तबशूर्पण-