रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंएकादशप्रकाशः ११. ( १०७ )
कावलिरूरी ॥ २२ ॥ राजतिहैयहज्योंकुलकन्या । धाइविरो-
जतिहै सँगधन्या ॥ केलिथलीजनुश्रीगिरिजाकी । शोभधरे-
शितकंठप्रभाकी ॥ २३ ॥ मनहरनछंद ॥ अतिनिकटगोदा-
वरीपापसंहारिणी। चलतरंगतुंगावलीचारुसंचारिणी। अलि-
कमलसौगंधलीलामनोहारिणी । बहुनयनदेवेशशोभामनो-
धारिणी ॥ २४ ॥
टी०-प्रतिमा चित्र अर्जुन ककुभवृक्ष औ पांडुपुत्र ॥ "अर्जुनः ककुभे पार्थे
इति मेदिनी" ॥ औ भीम अम्लवेतस वृक्ष औ भीमसेन ॥ "भीमोवृकोदरघोरे
शंकरप्यम्लवेतसं इत्यभिधानचिंतामणिः" ॥ जो कहौ रामावतार प्रथम भयो है
अर्जुनादि कृष्णावतार समय मो रहे हैं पूर्वापर विरोधहै तौ सब कल्पनमें दशौ
अवतार होतहैं सो अनेक रामावतार कृष्णावतार भये हैं तासों दोष नहीं है
यथा-तुलसीकृत रामायण में कहा है ॥ 'कल्पकल्पप्रति प्रभुअवतारा' । सुभगा
सौभाग्यवती स्त्री अथवा इति ताके सम शोभा पूरीहै दंडककी रुचि सिंदूरक जो
है वृक्ष विशेष औ तिलक वृक्ष करिकै रूरी सुन्दर है ॥ "सिन्दूरस्तरुभेदेस्या-
दितिमेदिनी ॥ तिलकोद्रुमरोगारूभेदेचतिलकालके इतिमेदिनी ॥ औ सुभगा
सिन्दूरक जो सेंदुर है ताके तिलक की अवली करिके रूरी है अथवा
सिन्दुरक कारिकै और और जे सुवर्ण मणि आदि के तिलक हैं तिनकी अवली
करिकै रूरी सुंदर है ॥ २२ ॥ कुलकन्या पद सों बडे की कन्या जानो धाइ
वृक्षविशेष औ उपमातास्तना दूध पिआवति है गिरिजा पार्वती शितकण्ठ
मयूर औ महादेव ॥ २३ ॥ जा पर्णकुटीके अति निकट पापसंहारिणी गोदा-
वरी नाम नदी है फेरि कैसी है गोदावरी चल चंचल जे तरंग हैं तिनके जे
तुंग समूह हैं तिनकी जे अवली पांती हैं तिनकी चारु कहे अच्छी भाँति संचा-
रिणी चलावन हारी है अर्थ अनेक तरंगें उठायो करति है अथवा तरंग तुंगाव-
लिन करिकै चारु संचारिणी चलनहारी है अलि भ्रमर युक्त जे कमल हैं तिनके
सौगंध सुगंध करिकै लीला है मनोहारिणी जाकी औ अलियुक्त कमलन करिकै
बहुनयन जे देवेश इंद्र हैं तिनकी शोभा की मानो धारिणी धारण कर्त्री है इंद्रेके
सहस्त्रनेत्र हैं यहाँ नेत्र सदृश अलियुक्त कमलहैं ॥ २४ ॥
मू०-दोधकछन्द ॥ रीतिमनोअविवेककीथापी ॥ साधुज-
की गति पावत पापी । कंजजकीमतिसीबडभागी । श्रीह-