रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
पृष्ठ 107, कुल 269 में से
संदर्भ में पढ़ेंदशमप्रकाशः १०. (१०१)
मू०-ईशईशजगदीशबखान्यो। वेदवाक्यबलतेपहिचान्यो॥
ताहिमेटिहठिकै रहिहौंतौ । गंगतीरतनकोतजिहौंतौ ॥ ३८ ॥
दोहा ॥ मौनगहीयहबातकहि, छोंडौसबैविकलप । भरतजाइ
भागीरथी, तीरकरचोसंकल्प ॥ ३९ ॥ इन्द्रवज्राछंद ॥ भागी
रथीरूपअनूपकारी। चंद्राननीलोचनकंजधारी ॥ वाणीबखा-
निमुखतत्त्वसोध्यौ। रामानुजैआनिप्रबोधबोध्यौ ॥४०॥ उपे-
न्द्रवज्राछंद ॥ अनेकब्रह्मादिनअंतपायो । अनेकधावेदनगीत
गायो॥ तिन्हेंनरामानुजबंधुजानौ। सुनौंसुधिकेवलब्रह्ममानौ॥
॥ ४१ ॥ निजेक्षयाभूतलदेहधारी । अधर्मसंहारमधर्मचारी ॥
चलेदशग्रीवहिमारिबेको । तपीव्रतीकेवलपारिबेको ॥ ४२ ॥
उठोहठीहोहुनकाजकीजै । कहैंकछूरामसोमानिलीजै ॥ अदोष
तेरीसुतमातुसोहै । सोकैनमायाइनकौनमोहै ॥ ४३ ॥
टी०-ईश जे विष्णु हैं और ईश जे महादेव हैं और जगदीश जे ब्रह्मा हैं तिन
यह बात बखान्यो है कि स्त्रीजितादिकनके वचन मेटे सों पातक नहीं होत सो
हम वेदवाक्य बलसों पहिचान्यो है अर्थ वेदमें तीन्यो देवके ऐसे वचन हैं ते हम
सुन्यो है अथवा तीनों देवन बखान्यो है औ वेदवाक्य बल बलहूं सों पहिचान्यो
अर्थ वेदहू यहै कहत है ॥ ३८ ॥ विकलपविचार भागीरथी मंदाकिनी ॥ ३९ ॥
तत्त्व कहे सारांश सोध्यो कहे ढूँढ्यो ता सारांश युक्त मुखसों वाणी बखानी
अथवा ऐसी वाणी बखानी जामें तत्त्व जो राम कथा तत्त्व है ता करिकै अपने
मुखको सोध्यो शुद्ध करचो औ रामानुज जे भरत हैं तिनको प्रबोध कहे उत्तम
ज्ञान आनि कहे ल्याइकै बोध्यो बोध करचो पद् कहिया जनायो कि रामचन्द्रप्रति
बन्धु बुद्धिरूपी निशामें सोवतरहें तामें जगायो ॥ ४० ॥ ४१ ॥ ४२ ॥ सुत
भरतको संबोधन है यासों या जनायो कि इनकी मायामें मैं मोहिहै तुम्हारी माते
इनको वनगमन चाह्यो ॥ ४३ ॥
मू०-॥दोहा॥ यहकहिकैभागीरथी, केशवभईअदृष्ट ॥भरत
कह्योतबरामसों, देहुपादुकाइष्ट ॥४४॥ उपेन्द्रवज्राछंद ॥ चले