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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

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पृष्ठ 105

दशमप्रकाशः १०. (९९)
देत । युद्धजुरनकोमनहुँप्रति, योधनबोलेलेत ॥ २५ ॥
लक्ष्मण-दंडकछंद॥ मारिडारौंअनुजसमेतयहिखेतआजु मेटि
परौं दीरघबचननिजमुरको । सीतानाथसीतासाथबैठेदेखिछत्र
तरयहिसुखशोषौंशोकसबहीकेउरको ॥ केशवदास विलासवी-
सविस्वेदासहोइकैकेयीकेअंगअंगशोकपुत्रज्वरको ॥ रघुराज
जूको साजसकलछिडाइलेउँभरतहिआजुराजदेउँयमपुरको २६
टी०-सैन्यके भयसों अथवा बालसों हालत जानिकै थंभित कहे थांबखंभा
इति ॥ २० ॥ सन्मुख घाव जूझिकै वीर स्वर्ग को जात हैं सो मानो राजकुमा-
रनके स्वर्ग जाइबेको भूमि मार्ग कहे गह कीन्हें हैं ॥ २१ ॥ विमान आकाश
गामी रथ व्योमयान 'विमानोऽस्त्रीत्यमरः' ॥ २२ ॥ मही जो पृथिवीहै तेहि अनंत
कहे अनेक अंतर किये अनेक भूरिके तुंग उठत हैं तेई अंतर व्यवधान हैं अथवा
अनंत लक्ष्मणको संबोधन है ॥ २३ ॥ रसना जिह्वा ॥ २४ ॥ २५ ॥ पुत्र
ज्वर कहे पुत्रमरण चौबीसवें प्रकाशमें कह्यो है कि जरा जब आवै ज्वराकी
सहेली तहां ज्वराशब्द मृत्युको वाची है रघुराजजूकी साज अर्थ गजरथादि राज
साजराज्य रामचन्द्रको है जाको लै ताके सब साज भरत सजे हैं तिन्हें छडाइ
रामचन्द्रमें साजिकै राज्यमें बैठारिये इत्यर्थः ॥ २६ ॥
मू०-दोहा ॥ एकराजमें प्रगटजहँ, द्वैप्रभुकेशवदास॥तहांबस-
तहैरैनदिन, मूरतिवंतबिनास॥२७॥कुसुमविचित्राछंद ॥ तबस-
बसैनाबहिथलराखी। मुनिजनलीन्हे सँग अभिलाषी ॥ रघुपति
केचरणनशिरनाये । उनहँसिकैगहिकंठ लगाये ॥२८॥ भरत
तोयकछंद॥ मातुसबैमिलिबेकहँआई । ज्योंसुतकी सुरभीसुल-
वाई ॥ लक्ष्मणस्योउठिकैरघुराई । पाँयनजायपरेदोउभाई
॥२९॥ मातनिकंठउठायलगाये । प्राणमनोमृतदेहनिपाये ॥
आइमिलीतबसीयसभागी । देवरसासुनकेपगलागी ॥ ३० ॥
टी०-पिताने भरतको राजा कियो है तासों भरतको राज्यपदभ्रष्ट होइ तौ
पिताको वचन निष्फल होइ या हेतु भरतको यमपुरको राज्यदेउँ जामें रामचन्द्र