सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 101, कुल 269 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 101

दशमप्रकाशः १०. (९५)
मू०-दोहा ॥ मारगयोंरघुनाथजू, दुखसुखसबहीदेत ॥
चित्रकूटपर्वतगये, सोदरसियासमेत ॥ ४७ ॥
इति श्रीमत्सकलोलोकलोचनचकोरचिंतामणिश्रीरामचंद्र
चंद्रिकायामिन्द्रजिद्विरचितायांरामस्यचित्रकूटगमनं
नामनवमः प्रकाशः ॥ ९ ॥
टी०-दर्शन सों सुख देत वियोग सों दुख देत ॥ ४७ ॥
इति श्रीमज्जगजननीजनकजानकीजानिप्रसादाय जन जानकीप्रसाद
निर्मिताया रामभक्ति प्रकाशिकाया नवमः प्रकाशः ॥ ९ ॥
मू०-दोहा ॥ यहप्रकाश दशमेंकथा, आवनभरतसुनाम ॥
राजमरणअरुतासुको, बसिबोनंदिग्राम ॥ १ ॥ दोधकछंद ॥
आनिभरत्तपुरीअवलोकी । स्थावरजंगमजीवसशोकी ॥ भाट
नहींविरदावलिसाजैं ॥ कुंजरगाजैनदुंदुभिबाजैं ॥ २ ॥ राजस-
भानविलोकियकोऊ । शोकगहेतवसोदरदोऊ ॥ मंदिरमातु-
विलोकिअकेली । ज्योंबिनवृक्षविराजतिवेली ॥ ३ ॥ तोट-
कछंद ॥ तबदीरघदेखिप्रणामकियो ॥ उठिकैउनकण्ठलगाइ
लियो ॥ नपियोजलसंभ्रमभूलिरहे । तबमातुसोंबातभरत्थ-
कहे ॥ ४ ॥
टी०-नाम कहे प्रसिद्ध ॥ १ ॥ २ ॥ राज सभामें कोऊ न देख्यो तब
शोकको गहे औ