रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदशमप्रकाशः १०. (९५)
मू०-दोहा ॥ मारगयोंरघुनाथजू, दुखसुखसबहीदेत ॥
चित्रकूटपर्वतगये, सोदरसियासमेत ॥ ४७ ॥
इति श्रीमत्सकलोलोकलोचनचकोरचिंतामणिश्रीरामचंद्र
चंद्रिकायामिन्द्रजिद्विरचितायांरामस्यचित्रकूटगमनं
नामनवमः प्रकाशः ॥ ९ ॥
टी०-दर्शन सों सुख देत वियोग सों दुख देत ॥ ४७ ॥
इति श्रीमज्जगजननीजनकजानकीजानिप्रसादाय जन जानकीप्रसाद
निर्मिताया रामभक्ति प्रकाशिकाया नवमः प्रकाशः ॥ ९ ॥
मू०-दोहा ॥ यहप्रकाश दशमेंकथा, आवनभरतसुनाम ॥
राजमरणअरुतासुको, बसिबोनंदिग्राम ॥ १ ॥ दोधकछंद ॥
आनिभरत्तपुरीअवलोकी । स्थावरजंगमजीवसशोकी ॥ भाट
नहींविरदावलिसाजैं ॥ कुंजरगाजैनदुंदुभिबाजैं ॥ २ ॥ राजस-
भानविलोकियकोऊ । शोकगहेतवसोदरदोऊ ॥ मंदिरमातु-
विलोकिअकेली । ज्योंबिनवृक्षविराजतिवेली ॥ ३ ॥ तोट-
कछंद ॥ तबदीरघदेखिप्रणामकियो ॥ उठिकैउनकण्ठलगाइ
लियो ॥ नपियोजलसंभ्रमभूलिरहे । तबमातुसोंबातभरत्थ-
कहे ॥ ४ ॥
टी०-नाम कहे प्रसिद्ध ॥ १ ॥ २ ॥ राज सभामें कोऊ न देख्यो तब
शोकको गहे औ