राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६० राजतरंगिणी
बुभोज सिंहलादीन्यो द्वीपान्स रुचियाऽकरात् ।
मोराकनामा मोराकभवनं भुवनाद्भुतम् ॥ ३५६ ॥
३५६. मोराक नामक वह सचिव भुवन में अद्भुत 'मोराक भवन'१ बनवाया
जिसने सिंहलादि द्वीपों का भोग किया था।
षट्त्रिंशद्गृहलक्षाणि पुरं तत्प्रथथे परा ।
यस्यास्तां वर्धनस्वामी विश्वकर्मा च सीमयोः ॥ ३५७ ॥
३५७. पूर्व काल में यह ख्याति थी—'इस नगर में छत्तीस लाख गृह हैं।' जिसकी
सीमा पर वर्धन स्वामी१ और विश्वकर्मा२ हैं।
दक्षिणस्मिन्नेव पारे वितस्तायाः पुरा किल ।
निर्मितं तेन नगरं विभक्तैर्युक्तमापणैः ॥ ३५८ ॥
३५८. वितस्ता के दक्षिण तटपर उसने सुविख्यात बाजारों से युक्त नगर निर्मित
कराया ।
ते तत्राभ्रंलिहाः सौधा यानध्यारुह्य दृश्यते ।
वृष्टिस्निग्धं निदाघान्ते चैत्रे चोत्कुसुमं जगत् ॥ ३५६ ॥
३५९. वहाँ वे गगनचुम्बी राजप्रासाद थे जिनपर आरूढ़ होकर निदाघ (ग्रीष्म) के
अन्त में वृष्टि स्निग्ध एवं चैत्र१ मास में विकसित कुसुम पूर्ण जगत् देखा जाता था ।
शताब्दा तक मिलता है। जोनराज के वर्णन से
यह स्पष्ट हो जाता है। (जोन राज० ४३०)
३५६. (१) मोराक भवन : इस स्थान
का पता नहीं चलता। इस पर भी कहीं से प्रकाश
नहीं पड़ता कि मन्त्री मोराक का आधिपत्य सिंहल
में किस प्रकार हुआ था ।
पाठभेद :
श्लोक संख्या ३५७ में 'षट्त्रिंशद्गृह' का
'षट्त्रिंशगृह' तथा 'सीमयोः' का पाठभेद 'सोमयोः'
तथा 'स मयः' मिलता है।
पादटिप्पणियाँ :
३५७ (१) वर्धन स्वामी : वर्धन स्वामी
तथा विश्वकर्मा के मन्दिरों का पता नहीं चलता।
वर्धन स्वामी का पुनः उल्लेख कल्हण ने त० ६ :
१९१ में किया है।
(२) विश्वकर्मा : यह मन्दिर भी सूत्रपात
की सीमा पर वर्धन स्वामी के समान होना चाहिये ।
इस मन्दिर का पुनः उल्लेख नहीं मिलता । श्रीस्टेन
का मत है कि त० ८ : २४३८ श्लोक से इस
मन्दिर की ध्वनि निकलती है ।
कश्मीर में विश्वकर्मा को सर्व शिल्प प्रवर्तक माना
गया है। उनकी पूजा का विधान भी किया गया है ।
विश्वकर्मा तथा पूज्यः सर्वशिल्पप्रवर्तकः ।
नील० 623 ॥
पाठभेद :
श्लोक संख्या ३५८ में 'दक्षिण' का पाठभेद
'दक्षिणे' मिलता है।
श्लोक संख्या ३५९ में 'चोत्कु' का पाठभेद
'वोत्कु' मिलता है।
पादटिप्पणियाँ :
३५९. (१) चैत्र : यह चान्द्रमास का एक
महीना किंवा मास है। इस मास में चित्रा नक्षत्र पर
पूर्णचन्द्र स्थित होता है। यह मास मार्च एवं अप्रैल