राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
पृष्ठ 568, कुल 984 में से
संदर्भ में पढ़ेंद्वितीय तरंग ४२५
ईशानोऽपि तमालिङ्ग्य स्वप्नेष्वपि सुदुर्लभम् ।
भूमिकामललम्बे कामिति को वक्तुमर्हति ॥ ११२ ॥
११२. ईशान ने स्वप्न में भी सुदुर्लभ उसे आलिंगन कर, किस आनन्द की प्राप्ति
की, यह कहने में कौन समर्थ है ?
असारं च विचित्रं च संसारं ध्यायतोर्मिथः ।
विवेकविशदा तत्र प्रावर्तत तयोः कथः ॥ ११३ ॥
११३. वहां पर परस्पर असार एवं विचित्र संसार का चिन्तन करते हुए, उन दोनों
की विवेक-विशद कथा चली।
अथ वार्तां विदित्वेमां कुतोऽपि नगरौकसः ।
सबालवृद्धाः सामात्यास्तमेवोद्देशमाययुः ॥ ११४ ॥
११४. किसी प्रकार इस बात को जानकर सबाल-वृद्ध, नगर निवासी, अमात्य सहित।
उस स्थान पर आ गये ।
पूर्वाकृतिविसंवादाद् भ्रमो नाऽयं स इत्यथ ।
तेनाच्छिद्यत संवादि निखिलाम्पृच्छता वचः ॥ ११५ ॥
११५. पूर्वाकृति से भिन्न होने के कारण यह, वह (मन्त्री) नहीं है, उस भ्रम को संवादी
निखिल लोगों से बातें पूछते हुए उसने दूर कर दिया ।
अर्थनां शासितुं राष्ट्रं पौराणामपराजकम् ।
सोऽन्वमन्यत कृच्छ्रेण निस्स्पृहः शासनाद्गुरोः ॥ ११६ ॥
सन्धिमान् आर्यराजा
११६. नृप हीन राष्ट्र के शासन हेतु, पुरवासियों की प्रार्थना करने पर, गुरु के
आदेश से निस्पृह उसने कष्ट पूर्वक अनुमति दे दी।
पाठभेद :
श्लोक संख्या ११२ में 'लतम्बे' का पाठभेद
'ललम्बे' मिलता है ।
श्लोक संख्या ११५ में 'संवादि' का पाठभेद
'संवाप्ति' मिलता है ।
श्लोक संख्या ११६ में 'अर्थनां' का पाठभेद
'अर्थानां' मिलता है ।
पादटिप्पणियाँ :
१. आइने अकबरी में सन्धिमति का नाम 'अरि-राज' और राज्य काल ४७ वर्ष दिया गया है ।
२. हसन सन्धिमान के विषय में लिखता है—
'राजा सन्धीमान अलमारूफ व आर्य राज ३०३१ क०
५४
में बातफ़ाक अराकीने शहर कश्मीर पर मुतमक्कन
हुआ । इन्तज़ाम सल्तनत और फ़ौज और रैयत के
साथ अदल व इन्साफ़ से पेश आने में बदिल व जान
कोशिश करता । जिस मुकाम पर उसे सूली दी
गयी थी वहाँ उसने सन्दशूर का मन्दिर बनवाया।
ईशा बरारी में अपने मुरशिद की ताज़ीम व तक-
रीम के पेश नज़र ईशेश्वर का मन्दिर बनवाया।
मुक़ाम बेद में बेदा देवी का मन्दिर और मौज़ा
बमरू में भीमा देवी की यादगार क़ायम की ।
परगना फाग की आबादी और सर सब्ज़ी के लिये
दरयाए सन्दलार से एक महर जारी की । जिसका
नाम भारी कुल रखा । परगना लार में आरी नाम