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राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

पृष्ठ 551, कुल 984 में से

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पृष्ठ 551

४१४ राजतरंगिणी
तं चाऽस्थिशेषमद्राक्षीत्कृप्यमाणं वलाद् वृकैः ।
शूलमूलावबद्धास्थिखण्डावष्टम्भनिश्चलम् ॥ ८५ ॥
८५. शृगालों द्वारा वलात् नोचे जाते हुए तथा शूल मूल में बँधे, अस्थि खण्ड के
सहारे निश्चल, अस्थि मात्र अवशिष्ट उसे ( गुरु ने ) देखा ।
समीरणसमीकीर्णमुण्डरन्ध्राग्रनिर्गतैः ।
ध्वनितैरनुशोचन्तमिवाऽवस्थां तथाविधाम् ॥ ८६ ॥
८६. वहां समीरण समाकीर्ण मुख रन्ध्र द्वारा निर्गत ध्वनियों से मानो वह अपनी
उस प्रकार की अवस्था को सोच रहा था ।
हा वत्स द्रष्टुमीदृक्ते जीवाम्यद्येति वादिना ।
तस्याऽऽकृष्यत मूलान्तःप्रोतं तेनाऽथ कीकसम् ॥ ८७ ॥
८७. 'हा ! वत्स !! आज मैं तुम्हें इस प्रकार देखने के लिये जीवित हूँ ?' इस
प्रकार कहते हुए उसने ( ईशान ) शूल विद्ध अस्थि को खींचा ।
वेष्टिताङ्घ्रिः शिरशीर्णैस्तत्कचैर्धूलिधूसरैः ।
अनैषीत्तं स कङ्कालं वारयन्भषतो वृकान् ॥ ८८ ॥
८८. शिरसे गिरे धूल धूसरित उसके केशों से लिप्त चरण वह ( ईशान ) गुर्राते हुए
वृकों को हटाता हुआ उस के कंकाल को ले गया ।
उचितां सत्क्रियां कर्तुं ततस्तस्य समुद्यतः ।
भाले विधातृलिखितं श्लोकमेतमवाचयत् ॥ ८९ ॥
८९. तदनन्तर उचित सत्क्रिया करने के लिये समुद्यत उसने भाल१ पर विधातृ
लिखित इस श्लोक२ को वाँचा ।
पाठभेद :
श्लोक संख्या ८६ में 'समाकीर्ण' का पाठभेद
'समाकीर्ण' तथा 'समापूर्ण' मिलता है ।
पादटिप्पणियाँ :
श्री स्टीन ने ८५ एवं ८६ श्लोको का अनुवाद
एक साथ किया है। हिन्दी अनुवाद में भी एक साथ
ही अनुवाद किया गया है। किन्तु श्री रणजोत
सीताराम पण्डित ने उनका अनुवाद अलग अलग
किया है। यहाँ भी अनुवाद अलग ही किया गया है।
उससे अर्थ में किसो प्रकार की विप्रतिपत्ति नहीं
होती है।
पाठभेद :
श्लोक संख्या ८८ में 'वेष्टिताङ्घ्रिः' का 'वेष्टिताङ्घ्र'
'सकङ्काल' का 'स्वकं कालं' तथा 'भषतो' का
पाठभेद 'भाषतो' मिलता है।
पादटिप्पणियाँ :
८९ [ १ ] भालरेखाः-प्राचीन काल में रेखा
विज्ञान सामुद्रिक विद्या बहुत विकसित थी । हस्त-
रेखा, पादरेखा, ललाटरेखा, आदि देखकर जन्म-
पत्र तैयार कर दिया जाता था । आज भी प्रत्यन्त
मेधावी अनुभवी सामुद्रिक हस्तरेखा देखकर जन्म
तिथि निकाल लेते हैं ।