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राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

पृष्ठ 468, कुल 984 में से

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पृष्ठ 468

प्रथम तरंग
सषड्दिनां वर्षषष्टिं पालयित्वा स मेदिनीम् ।
भोक्तुं पुण्यपरीपाकं लोकान्सुकृतिनामगात् ॥ ३४५ ॥
३४५. उसने साठ वर्ष छह दिन¹ मेदिनी का पालन करके, पुण्य परिपाक भोग हेतु, सुकृ-
तियों के लोक में प्रस्थान किया ।
गोकर्णस्तत्सुतः क्षोणीं गोकर्णेश्वरकृद्वृधे ।
अष्टपञ्चाशतं वर्षांस्त्रिंशत्याऽह्नां विवर्जितान् ॥ ३४६ ॥
गोकर्ण:¹
३४६. गोकर्णेश्वर२ का निर्माता उसके पुत्र गोकर्ण ने तीस दिन कम अट्ठावन वर्ष३ पृथ्वी
पर शासन किया ।

प्रतीत होता है, कल्हण ने गोपादित्य सम्बन्धी श्री एस पी० पण्डित ने भी ६० वर्ष ६ दिन राज्य-
प्रशस्तियों से अपनी लेखन सामग्री ली थी । काल माना है
प्रशस्ति के लिये टिप्पणी पृ० १३ 'प्रशस्ति पाठभेद :
पट्ट' द्रष्टव्य है । श्लोक संख्या ३४६ में 'क्षोणी' का 'क्षोणीं',
(२) पशुक्षय— यज्ञ में पशुहत्या विहित थी । वृधे" का 'हृदे'; 'त्याऽह्नां' का 'त्यह्नां' तथा 'विवर्जि-
अतएव राजा ने पशुहत्या यज्ञ के अतिरिक्त सब तान्' का 'विवर्जनात्' पाठभेद मिलता है ।
स्थानों पर बन्द करवा दी । कश्मीर शीत प्रधान पादटिप्पणियाँ :
देश है । तथापि उसने धर्म भावना से प्रेरित होकर ३४६ (१) गोकर्ण : आइने अकबरी में राजा
पशुहत्या वर्जित कर दी । प्रतीत होता है । गोकर्ण को 'कुरेन' तथा उसका राज्यकाल ५७ वर्ष
राजा धर्मभीरु था । सुधारक था । ११ दिन दिया गया है । हसन लिखता है-क. २७३४
पाठभेद : में उसके (गोपादित्यके) बेटे राजा गोकर्न ने इकबाल-
श्लोक संख्या ३४५ में 'सषड्दिनां' का 'सपञ्चमासा' मन्दी का ताज सर पर रखकर अठावन बरस सल्तनत
तथा 'परीपाकं' का पाठभेद 'परिपाकं' तथा 'परो किया ।
पाकं' मिलता है । श्री स्टीन राज्याभिषेक का समय कल्हण की
पादटिप्पणियाँ : गणनानुसार लौकिक संवत् २७६७ वर्ष छठवां
३४५. (१) छह दिन : कुछ विद्वानो का मत है मास तथा उन्नीसवां दिन देते हैं । श्री एस०
कि 'छह दिन' के स्थान पर 'छह मास' होना पी० पण्डित ने यह काल ईसा पूर्व ३११ वर्ष माना
चाहिए । श्री स्टीन तथा श्री रणजीत सीताराम पण्डित है । श्री जनरल कनिंघम के अनुसार राजा गोकर्ण
दोनों ने ही ६ दिन ही पाठ ठीक माना है । पाठ दोनों का नाम किदार शैलो की मुद्रा पर टंकित मिला है ।
ही मिलते हैं । अतएव मैंने प्रचलित पाठ के अनुसार परन्तु बादमें उस मुद्रा के प्रति सन्देह प्रकट किया गया
'६ दिन' ही दिया है । किसी गणना पर इसका है कि वास्तव में वह गोकर्ण की थी । श्री देवसेन
निश्चय करना कठिन है । श्री स्टीन ने ठीक लिखा श्री कनिंघम के मत का खण्डन करते हैं ।
है कि राजा युधिष्ठिर का राज्य काल नही (२) गोकर्णेश्वर : गोकर्णेश्वर महादेव का कहाँ
दिया गया है । अतएव गणना करना कठिन है । स्थान था अभी तक पता नही चला है । गोकर्ण क्षेत्र