राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१९० राजतरंगिणी
विस्मारितो नित्यकृत्यं कार्यव्यग्रतयैकदा ।
विदूरसोदरजलास्नावनालाभदुर्मनाः ॥ १२५ ॥
अपश्यन्निर्गमात्स्थानादकस्मादुत्थितं पयः ।
स सोदरात्रिसंवादि वर्णस्वादादिभिर्गुणैः ॥ १२६ ॥
१२५,१२६. कार्य व्यग्रता के कारण एकदिन राजा सुदूर स्थित सोदर तीर्थ में नित्यकृत्या-
नुसार स्नान करना भूल गया । यह इस विस्मृति के कारण दुर्मन हो गया। एक जल हीन स्थान में
अकस्मात् एक जल स्रोत उद्भूत हो गया था । वह जल वर्ण, स्वाद एवं अन्य गुणों मे सोदर तीर्थ
के जलतुल्य था।
यहाँ पर कोई प्राचीन वस्तु नहीं मिली । यहाँ
ब्राह्मणों के दो घर हैं। वे देवी की पूजा करते हैं।
अखरोट के कुछ वृक्ष हैं। उनका फल बेचकर जीविको-
पार्जन करते हैं। स्थान सुन्दर है। यहाँ से डल
लेक तथा पर्वतों का अच्छा दृश्य मिलता है। सारिका
पर्वत का भी अच्छा दृश्य मिलता है। हरमुकुट पर्वत
शिखर माला भी दूर पर दिखाई देती हैं। निस्सन्देह
यह स्थान देवी पार्वती के तपस्या योग्य है। यहाँ
शान्ति मिलती है। तरुछाया में बैठकर प्रकृति की
शोभा निरखने में आनन्द मिलता है।
मुझे परेशान देखकर उस वृद्ध ब्राह्मण ने कहा—
"मैं पाँच वर्ष का था। उस समय नीचे वाला महल
राजा बनवा रहे थे। वहाँ पर एक बहुत बड़ा शिव-
लिंग था। उस लिंग तथा देवस्थान के कारण भूमि
पर कब्जा पाना कठिन हो रहा था। राज्य प्रासाद
के किसी खुले या बन्द भाग में शिवलिंग रहने देने
का अर्थ था। जनता दर्शन और तीर्थ यात्रा के लिये
आती। अतएव राजा हरी सिंह ने शिवलिंग उखड़-
वाकर फेंकवा दिया। सलाहकारों के सुझाव पर
शिवलिंग कही गाड़ दिया गया। मैदान चौरस कर
दिया गया। मुमकिन है। वह शिवलिंग कहीं मैदान
या मकान के नीचे दबा पड़ा हो।"
मुझे इस कथन में सच्चाई मालूम हुई। ज्येष्ठा
देवी जाने का मार्ग पैलेस अर्थात् होटल से होकर
जाता है। वह मार्ग भी राजा ने बन्द करवा दिया
था। राजा कर्ण सिंह के राजा होने पर वह मार्ग
खुल गया है। लोग ज्येष्ठा के मन्दिर तक इस मार्ग
से जा सकते हैं। अब लोग यात्रा करने आने लगे
हैं। यद्यपि मैंने स्वयं देखा कि मार्ग के द्वार पर
साइन बोर्ड लगा था—"प्राइवेट रोड।"
नीचे उतर कर आया। वृद्ध ड्राइवर से सब
बातें बतायीं। वह चकित हुआ। वह स्थान तो
नहीं बता सका कि शिवलिंग इस समय कहाँ गड़ा है
परन्तु यह स्वीकार किया कि यहाँ शिवलिंग था।
किस स्थान पर वह था यह निश्चयात्मक रूप से
नहीं बता सका।
उसने एक बात और बताई। उसका समीप
ही क्वार्टर था। वह वृद्धों से सुनता आया था।
एक शेर शिवलिंग की नित्य परिक्रमा करने आता था।
ज्येष्ठा देवी की भी परिक्रमा करता था। मेरी सन्देह
दृष्टि देखकर उसने निश्चयात्मक ढंग से विश्वासपूर्ण
वाणी में कहा—मैं छोटा था। अपने क्वार्टर में रहता
था। मैंने स्वयं देखा है। शेर का एक बच्चा आता
था। शिवलिंग की परिक्रमा करता था। ज्येष्ठा देवी
की परिक्रमा करता था। यहाँ आबादी बढ़ने लगी।
बहुत दिन हुआ उसका आना बन्द हो गया। और
फिर तो यह देवस्थान ही समाप्त हो गया।
मैं यह सब सुनकर इसी निष्कर्ष पर पहुँचा।
प्राचीन शिवलिंग पैलेस जो अब होटल हो गया है
उसके मैदान अथवा इमारत के नीचे कही गड़ा है।
अथवा डल लेक में खण्डित मूर्ति या लिंग की तरह