राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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राजतरंगिणी
तदाऽऽक्रान्तासुहृच्चक्रः स चक्रायुधसङ्गरे ।
चक्रधाराऽध्वना घोरश्चक्रवर्ती दिवं ययौ ॥ ६९ ॥
६९. तब वह चक्रवर्ती राजा शत्रुओं की चक्र पंक्ति द्वारा परावृत चक्रधर के चक्रधारपथ
गति-द्वारा उस समरांगण में गमन किया ।
अन्तर्वत्नीं तस्य पत्नीं तदा यदुकुलोद्भवः ।
राज्ये यशोवतीं नाम द्विजैः कृष्णोऽभ्यषेचयत् ॥ ७० ॥
७०. यदु कुलोद्भव श्री कृष्ण ने दामोदर की गर्भवती पत्नी यशोवती देवी का द्विजों से
अभिषेक करा दिया ।
पाठभेद :
श्लोक संख्या ६९ मे 'तदा' का 'तत्रा', 'सचक्रा'
का 'सश्चक्रा' तथा 'राघ्वना' का 'राघुना', राधना,
'राध्यना' पाठभेद मिलता है ।
पादटिप्पणियाँ :
६९ (१) चक्रधर से यहाँ अर्थ श्री कृष्ण से है।
वह यादव सेना सहित गान्धार में स्वयंवर मे भाग
लेने जा रहे थे। मार्ग में दामोदर ने कश्मीरी
सेना के साथ उनपर आक्रमण किया । युद्ध में
दामोदर का वध श्रीकृष्ण के चक्र द्वारा हुआ था।
पिता का ज्येष्ठ भ्राता बलराम ने तथा पुत्र का
कनिष्ठ भ्राता श्री कृष्ण ने वध किया था ।
'चक्रधाराध्वना' शब्द क्षेत्र प्रिय है। कश्मीर
के पंडितो को श्री स्टीन के शब्दो में यह वाक्य बहुत
प्रिय था । इसका सरल अर्थ होता है। 'चक्रधार पथ'
से दामोदर दिवंगत हुआ ओर स्वर्ग गया था। यह
वाक्य 'चक्रधर. कृष्णः एव पन्थास्तेन' भी स्टीन
के मत में हो सकता है । उस समय अर्थ हो
जायगा 'श्रीकृष्ण चक्रधर द्वारा मार्ग खोला गया'।
कल्हण की कल्पना यह भी हो सकती है कि भग-
वान् कृष्ण द्वारा आहत होने पर दामोदर निश्चय
ही स्वर्ग गया ।
पाठभेद :
श्लोक संख्या ७० में 'यशोवती' का 'यशोवन्ती'
तथा 'षेचयत्' का पाठभेद 'सूचयत्' मिलता है ।
पादटिप्पणियाँ :
७०(१) यशोमती : नीलमत पुराण में रानी का
नाम यशोमती नहीं दिया गया है। उक्त श्लोक स०
२७ में 'तस्य पत्नी' अर्थात् 'उसकी पत्नी' शब्द ही
का उल्लेख है।
अन्तर्वत्नीं तस्य पत्नीं वासुदेवोऽभ्यषेचयत् ।
भविष्यत्पुत्रराज्यार्थं तस्य देशस्य गौरवात् ॥
९ : २७
कल्हण ने यशोमती का नाम किसी अन्य पूर्व
ऐतिहासिक ग्रन्थ से लिया है। कल्हण ने रा० त०
१ : ७३ तथा ८ : ३४०८ में यशोमती के नाम का
स्पष्ट उल्लेख किया है। यह राजा दामोदर की
पत्नी थी ।
ह्युगन के अनुसार-'राना सन् १० क० मे तख्त
सल्तनत पर बैठी। बादशाहों के काम मर्दों की तरह
इन्तहाई बहादुरी और खुश असलूबो से अंजाम दिये।
पहले मालूम हो चुका है कि यह अपने खाविन्द
राजा दामोदर से हामिला थी । इसलिए मुकर्रर
वक्त गुजरने पर बाल गोतन्द इससे पैदा हुआ।
मुद्दत हकूमत १५ साल ।'
(२) गर्भवती का अभिषेक : भगवान् के मंत्री
गर्भवती रानी यशोमती के अभिषेक से प्रसन्न नही
थे । भगवान् ने इसको शंकाओ का समाधान पौरा-
णिक प्रमाणों का उद्धरण देकर कर किया था ।
यह विषय हिन्दू उत्तराधिकार के मौलिक प्रश्न
को उठाता है। प्रचलित हिन्दू कानून के अनुसार