रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)
Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४१ )
मनसा मंदिर माहिँ धूप धुपइये ।
प्रेमप्रीति की माल राम चढ़इये ॥१॥
चहुँ दिसि दियना बारि जगमग हो रहिये ।
जोति जोति सम जोती हिलमिल हो रहिये ॥२॥
तन मन आतम वारि तहाँ हरि गाइये री ।
भनत जन रैदास तुम सरना आइये री !
॥ ८४ ॥
नाम तुम्हारो आरतभंजन¹ मुरारे ।
हरि के नाम बिन झूठे सकल पसारे ॥टेक॥
नाम तेरो आसन नाय तेरो उरसा² ।
नाम तेरो केसरि लै छिड़का रे ॥१॥
नाम तेरो अमिला नाम तेरो चंदन ।
धसि जपै नाम ले तुझ कूँचा रे ॥२॥
नाम तेरो दीया नाम तेरो बाती ।
नाम तेरो तेलै ले माहिँ पसारे ॥३॥
नाम तेरे की जोति जगाई ।
भयो उँजियार भवन सगरा रे ॥४॥
नाम तेरो धागा नाम फूल माला ।
भाव अठारह सहस जुहारे³ ॥५॥
तेरो कियो तुझे का अरपूँ ।
नाम तेरो तुझे चँवर ढुला रे ॥६॥
अष्टादस अठसठ चारि खानि हू ।
बरतन है सकले संसारे ॥७॥
कह रैदास नाम तेरो आरति ।
अंतरगत हरि भोग लगा रे ॥८॥
१ कष्ट हरता । २ हुरसा चंदन घिसने का । ३ प्रनाम ।
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