रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)
Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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॥ २१ ॥
कहाँ सूते मुग्ध नर काल के मँझ मुख।
तजिय बस्तु राम चितवत अनेक सुख ॥टेक॥
असहज धीरज लोप कृस्न उधरंत कोप,
मदन भुवंग१ नहिँ मंत्र जंता।
बिखम पावक ज्वाल ताहि वार न पार,
लोभ की अयनी२ ज्ञान हंता ॥१॥
बिखम संसार ब्याल१ ब्याकुल तबै,
मोह गुन बिखै सँग बंधभूता३ ।
टेरि गुन गारुड़ी४ मंत्र स्रवना दियो,
जागि रे राम कहि कहि के सूता ॥२॥
सकल सिम्रित५ जिती सत मति कहै तिती,
हैँ इनही परम गति परम वेता६ ।
ब्रह्म ऋषि नारद संभु सनकादिक,
राम राम रमत गये पार तेता ॥३॥
जजन जाजन७ जाप रटन तीरथ दान,
ओषधी रसिक गदमूल८ देता।
नागदवनि जरजरी राम सुमिरन बरी,
भनत रैदास चेत निमेता९ ॥४॥
॥ २२ ॥
रामा हो जग जीवन मोरा।
तूँ न बिसोरि राम मैं जन तोरा ॥टेक॥
सकट सोच पोच दिन राती।
करम कठिन मोरि जाति कुजाती ॥१॥
१ सांप। २ सेना, फौज। ३ बँधा हुआ। ४ सांप के विष उतारने का मंत्र।
५ धर्मशास्त्र। ६ जानने वाला। ७ यज्ञ करना और कराना। ८ रोग की जड़ को पैदा
करता है। ९ नियम करने वाला।