रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)
Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १० )
परिवारि बिमुख मोहिँ लागि । कछु समुझि परत नहिँ जागि¹ ॥२॥
यह भौ बिदेस कलिकाल । अहो मैं आइ पर्योँ जमजाल ॥४॥
कबहुक तोर भरोस । जो मैं न कहूँ तो मोर दोस ॥ ४ ।
अस कहिये तेऊ न जान । अहो प्रभु तुम सरबस में सयान ॥५॥
सुत सेवक सदा असोच । ठाकुर पितहिँ सब सोच ॥ ६ ॥
रैदास बिनवै कर जोरि । अहो स्वामी तुम मोहिँ न खोरि² ॥७
सु³ तौ पुरबला अकरम मोर । बलि जाउँ करौ जिन कोर⁴ ॥८॥
॥ १९ ॥
त्यौँ तुम कारन केसवे, लालच जिव लागा ।
निकट नाथ प्रापत नहीँ, मन मोर अभागा ॥टेक॥
सागर सलिल⁵ सरोदिका⁶, जल थल अधिकाई ।
स्वाँति बुंद की आस है, पिउ प्यास न जाई ॥ १ ॥
जौँ रे सनेही चाहिये, चित्त बहु दूरी ।
पंगुल फल न पहुँच ही, कछु साध न पूरी ॥ २ ॥
कह रैदास अकथ कथा, उपनिषद⁷ सुनीजै ।
जस तूँ तस तूँ तस तुहीँ, कस उपमा दीजै ॥ ३ ॥
॥ २० ॥
गोबिंदे भवजल ब्याधि अपारा ।
ता में सूझै वार न पारा ॥टेक॥
अगम घर दूर उरतर, बोलि भरोस न देहू ।
तेरी भगति अरोहन संत अरोहन⁸, मोहिँ चढ़ाइ न लेहू ॥१॥
लोह की नाव पखान बोझी, सुकिरित भाव बिहीना ।
लोभ तरंग मोह भयो काला, मीन भयो मन लीना ॥२॥
दीनानाथ सुनहु मम बिनती, कवने हेत बिलंब करीजै ।
रैदास दास संत चरनन, मोहिँ अब अवलंबन दीजै ॥३॥
१ संसार या जगने पर। २ दोष न विचारो। ३ सो। ४ कसर। ५ पानी
६ तालाब का पानी। ७ वेद का एक अंग जिस में ब्रह्म का निरूपन है। ८ सीढ़ी।