रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)
Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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सब मेँ हरि है हरि मेँ सब है, हरि अपनो जिन जाना ।
साखी नहीँ और कोइ दूसर, जाननहार सयाना ॥१॥
बाजीगर सौँ रचि रहा, बाजी का मरम न जाना ।
बाजी झूठ साँच बाजीगर, जाना मन पतियाना ॥२॥
मन थिर होइ तो कोइ न सूझै, जानै जाननहारा ।
कह रैदास बिमल बिबेक सुख, सहज सरूप सँभारा ॥३॥
॥ ११ ॥
अखिल खिलै नहिँ का कहि पंडित, कोइ न कहै समुझाई ।
अबरन बरन रूप नहिँ जा के, कहँ लौ लाइ समाई ॥टेक॥
चंद सूर नहिँ रात दिवस नहिँ, धरनि अकास न भाई ।
करम अकरम नहिँ सुभ असुभ नहिँ, का कहि देहुँ बड़ाई ॥१॥
सीत वायु ऊसन नहिँ सरवत१, काम कुटिल नहिँ होई ।
जोग न भोग क्रिया नहिँ जा के, कहौँ नाम सत सोई ॥२॥
निरंजन निराकार निरलेपी, निरबीकार निसासी ।
काम कुटिलता ही कहि गावैँ, हरहर२ आवै हाँसी ॥३॥
गगन३ धूर४ धूप५ नहिँ जा के, पवन पूर नहिँ पानी ।
गुन निर्गुन कहियत नहिँ जाके, कहौ तुम वात सयानी ॥४॥
याही सों तुम जोग कहत हौ, जब लग आस की पासी६ ।
छुटै तबहि जब मिलै एकही, भन रैदास उदासी ॥५॥
॥ १२ ॥
नरहरि७ चंचल है मति मेरी । कैसे भगति करूँ मैँ तेरी ॥टेक॥
तूँ मोहिँ देखै हौं तोहि देखूँ, प्रीति परस्पर होई ॥१॥
तूँ मोहिँ देखै तोहि न देखूँ, यह मति सब बुधि खोई ॥२॥
१ पानी के ऐसा हो कर चूना। २ ठठाय के। ३ आकाश। ४ पृथ्वी। ५ तेज,
अग्नि। ६ फाँसी। ७ नरसिंह जी अर्थात् ईश्वर के एक अवतार का नाम।