रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)
Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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॥ ८ ॥
आयौँ हो आयौँ देव तुम सरना ।
जानि कृपा कीजे अपनौ जना ॥टेक॥
त्रिबिध जोनि वास जम को अगम त्रास,
तुम्हरे भजन बिन भ्रमत फिरौँ ।
ममता अहं विषै मद मातौ,
यह सुख कबहुँ न दुतर१ तिरौँ ॥१॥
तुम्हरे नावँ बिसाम छाड़ी है आन की आस,
संसार धरम मेरो मन न धीजै२ ।
रैदास दास की सेवा मानि हो देव विधि देव,
पतित पावन नाम प्रगट कीजै ॥२॥
॥ ९ ॥
भाई रे राम कहाँ मोहिँ बताओ ।
सत राम ता के निकट न आयौ ॥टेक॥
राम कहत सब जगत भुलाना, सो यह राम न होई ।
करम अकरम करुनामय केसो, करता नावँ सु कोई ॥१॥
जा रामहीँ सबै जग जानै, भरम भुले रे भाई ।
आप आप तैँ कोइ न जानै, कहै कौन सो जाई ॥२॥
सत तन लोभ परस जीतै मन, गुना प्रश्न नहिँ जाई ।
अलख नाम जाको ठौर न कतहूँ, क्यों न कहो समुझाई ॥३॥
भन रैदास उदास ताहि ते, करता क्यों है भाई ।
केवल करता एक सही सिर, सत्त राम तेहि ठाईँ ॥४॥
॥ १० ॥
ऐसो कछु अनभौ कहत न आवै ।
साहिब मिलै तो को बिलगावै ॥टेक॥
१ दुस्तर, कठिन । २ धीर धरै ।