पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंग्यारहवां समय २ ] पृथ्वीराजरासो । ४४०
मारूफ षान तत्तार षां । षान षान खेरिन सुबर ॥
काजी बल्लाइ कलहंत रिन । बोलि बीर पच्छे सुनर ॥
छं० ॥ ३ ॥ रु० ॥ ३ ॥
अरब ख़ां नवता नहीं है इसलिये उस पर चढ़ाई
होनी चाहिए यह आज्ञा दी ॥
दूहा ॥ * आरब पति अर सिंध तट । विन सन्नाम सुरतान ॥
तिन उप्पर सज्जिय सयन । कढ्ढर कंडि फुरमांन । छं० ॥ ४ ॥ रु० ॥ ४ ॥
चढ़ाई की सेना की संख्या ॥
कवित्त ॥ सत्त पंच वाहन्न बिसाल * । लष दुइ तुरी लषिन्ना ॥
आरब्बी सैं पंच । लष इक सोधि सुखिन्ना ॥
काविल्ली उर तेज । रोम रोमी पंजाबी ॥
लोहानी जल्ह वान । सेष गोरी आरब्बी ॥
लष एक लष लष्यां मुहा । पारेवह जिन पंष लिय ॥
चालंत कटक गोरी प्रबल । क्षूणी चाली पंचनिय ॥ छं० ॥ ५ ॥ रु० ॥ ५ ॥
सेना की धूल का वर्णन ॥
छंद भुजंगी ॥ चली पंषिनी सथ्य चौसठ्ठ थानं । चढी अग्ग पंती सुदंती प्रमानं ॥
तिनं दंत कंती तडित्ता समानं । ............................ छं० ॥ ६ ॥
ध्वजा पंति फैरंत भादब्ब भारं । झवक्कै मनौ सूर संगी कि सारं ।
बजै चंत्न चंबाल गज्जै कद्दारं । बज्जै तह सहं पपीहं दहूरं ॥ छं० ॥ ७ ॥
धरं बंक थहौर उड्डौर घंटं । बरं डैर भंजे धरै बिच दहं ॥
अगैं चल्लियं अग्गिवानं समीरं । तिनं पुट्ठ षुर्सान षां बंधि भीरं ॥ छं० ॥ ८ ॥
३ पाठान्तर-दिसि बर आरब साह । दिष्ट । सुय । डुलि । सजि । विचारिय । पांन ।
षुरसांन । पांन । जिते । अधिकारिय । मारूफ । पांन । ततार । पांन पांन । रन । बलाय । पक्कै ॥
४ पाठान्तर-सिंधु । नट । सलाम । सुरतांन । उपर । सजिय । फुरमांन ॥ * अरब ख़ां
नामक कोई छोटा राजा वा सरदार उस समय सिंधु तट पर के देश का पति था कि जिसके
पास चित्ररेखा थी ॥
५ पाठान्तर-सत । वाहन । * अधिक पाठ है ॥ लघु । दोइ । लषीना । आरबी । पांच
सें । लष । लीनां । कविली । बांन । शेष । गौरी । आरबी । लष । लषां । मुहां । पारेवाह ।
षलिय । गौरी । पंषनीय ॥