पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 462, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ेंअथ चित्ररेषा समयौ लिख्यते ॥
( ग्यारहवां समय । )
चित्ररेखा की उत्पत्ति पूछना ॥
दूहा ॥ पुच्छि चंद वरदाइ नैं । चित्ररेष उतपत्ति ॥
षां हुसेन पावास कचि । जिम लीनी असपति ॥ छं० ॥ १ ॥ रू० ॥ १ ॥ *
शहाबुद्दीन के विक्रम का वर्णन ॥
कवित्त ॥ गज्जनेस अवदेस । साचि पल्हांन कुसावं ॥
बदक स्वामि भेद्वां । कुंडि गष्पर क्षिति आवं ॥
जल जोवन साचाव । दीन दुरंगे करि गिन्निय ॥
हिंदंवान मेछान । थान थानह करि जिन्निय
बजि विषम वाइ सुरतान प्पन । साचि बदौं सब दीन पति ॥
अनसंक कंक मनु लंकपति । जनु जोवन तन रवित पति ॥
छं० ॥ २ ॥ रू० ॥ २ ॥
शहाबुद्दीन का अरब ख़ां पर चढ़ाई करने की
इच्छा कर सरदारों से पूछना ॥
कवित्त ॥ दिसि अरब सुरतांन । दिष्टि आलोकि वंक सुन्न ॥
आकंपै दिसि डुल्लि । अचल चालंन चित्त दुन्न ॥
सज्जि सेन चतुरंग । जंग अनभंग विचारिय ॥
बोलि षान षुरसान । पान जित्ते अधिकारिय ॥
१ पाठान्तर-पुछि । बरदाईनैं । उतपति । लीनिय । अमपति ॥ * इस समय में कवि ने
हुसेन षां के कहे अनुसार जैसे शहाबुद्दीन ने चित्ररेखा को प्राप्त किया था सो वर्णन किया है ॥
२ पाठान्तर-पलांणि । पलांन । कसांबि । बदकर । सांभि । दुरंगे । गिनीय । गिनिय ।
हिंदवांन । मेक्षांन । थांन । लिंनिय । सुरतांन । सहाबदी । मनौं । जुन । जर ॥