पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४३० पृथ्वीराजरासो । [ दसवां समय ६
पांच सरदारों को साथ लेकर आखेट को
पृथ्वीराज का निकलना ॥
कवित्त ॥ आखेटक संभरिय । राज मेलान न आइय ॥
हस्सम हय गय मुक्कि । तक्कि षटू बन धाइय ॥
के हंका के छक्कि । तथ्थ पछिवानह लग्गा ॥
सथ्थ पंच सामंत । जूझ चहुआन विलग्गा ॥
पंमार सलष अलषह बलिय । चाहुआन रघुवंस हिम ॥
रुंध्यौ नरिंद चालुक्क सम । सिंघ विंटि वागह जिम ॥
छं० ॥ १६ ॥ रू० ॥ १६ ॥
कवि चन्द का कहना कि हमें शहाबुद्दीन के आने का सन्देह
है और खोज करने पर चारों ओर यवनों को पाना ॥
कवित्त ॥ करि बिंटिय चहुआन । बिप्र सब सस्त्र समाधिय ॥
सुब्बिचान फुरमान । बंचि कविचंद सुनाइय ॥
सुबर जोर साहाब । साह से देस सुरंगा ॥
तोन कमान प्रमान । दए दस हत्थ तुरंगा ॥
किन एक खिमा किम रषकैं । चावद्दिसि नृप विंटयौ ॥
तन तोन झारि संमुह भए । राज अदब्ब सुमिरियौ ॥
छं० ॥ १७ ॥ रू० ॥ १७ ॥
शाह की ओर से आक्रमण आरम्भ होना ॥
कवित्त ॥ चंपि लहहिय हत्थ । जमन ठट्ठे चउद्दिसि ॥
चूक चिंत चहुवान । कन्द कड्डी सु बंक असि ॥
हाजी षान गष्षर नरिंद * । षंति षग षाजि विदत्थं ॥
तेग झार विम्भार । सलष घल्ली गज्ज बत्थं ॥
१६ पाठान्तर—आईय । हसम । तकि । षटू । धाईय । तथ । पछिवानह । लगा । सथ ।
चहुवांन । बिलगा । चाहुवांन । चाहुअनि । रुध्यौ । चालुक । वाँटि ॥
१७ पाठान्तर—वंटिय । चहुआंन । सु विहांन । फुरमांन । बिंचि । साह संदेस सुरंगा ।
तोन । कमांन । प्रमान । हथ । छिमाक्किम पकरिकें । चाषदिसि । वीटयौ । अदब । मिटयौ ॥