पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 436, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ें४२६ पृथ्वीराजरासो। [ दसवां समय २
मोतिराव क्षत्रिय का शहाबुद्धी को पृथ्वीराज
के आखेट का समाचार देना ॥
कवित्त ॥ नीतिराव षत्रीय† । चरित ग्रेहं चहुआनं ॥
दिल्ली को वर भेद । लिखे कग्गद सुविच्चानं ॥
बरष उभै षट मास । करै सुबिचान पलान्यो ॥
षहू बन घन राज । बीर आखेटक जान्यौ ॥
सामंत सूर स्थंथंन कै । बर वीरं तन षेलद्धय ॥
दैवान जुद्ध चहुआन भर । भिरि दुरजन भर ठिल्लइय ॥ कं० ॥ ४ ॥ रु० ॥ ४ ॥
आखेट का अच्छा अवसर पा कर शहाबुद्दीन का भेद लेने
को दूत भेजना, दूत का समाचार देना, शाह का
सरदारों को आज्ञा देना कि छिप कर
पृथ्वीराज पर चढाई करो ॥
दूहा ॥ इक तप पंग नरिंद कौ । अरु * सुनि अवाज सुरतान ॥
आखेटक प्रथिराज गय । षटवन चहुवान ॥ कूं० ॥ ५ ॥ रु० ॥ ५ ॥
कवित्त ॥ आखेटक बन तक्कि । दूत गज्जनैं सपत्ते ॥
साह जे,र साहाब । दिए पुरमान निरत्ते ॥
चसम छय गय मुक्कि । राज षटू बन छिल्लै ॥
सासं ब कैः सध्य । भुक्त गुज्जर दिसि मिल्ल ॥
निक्कस्यौ द्रव्य साहाब दिय । बर नागौरं ग्रेह धन ॥
ढूढ घात साचि गोरी सुबर । करौ चूक वै सज्ज रन ॥ कं० ॥ ६ ॥ रु० ॥ ६ ॥
४ पाठान्तर-ग्रेहं । चहुवांनं । कग्गर । कोपि सु । बिहांत । पलांत्यो । षटू । जांत्यौ ।
सथहं । संयं। कौं । कौ । बेलर्दय । दैवांन । दैवानं । चहुत्रांन । दुजन । ठिल्लइय । ठिल्लर्दय ॥
† नीतिराव षत्रिय नामक मुख़बिर था कि जो पृथ्वीराज के यहां की खबरें शहाबुद्दीन
को दिया करता था । वाह यह कैसा देशहितैषी पुरुष था ! ! !
५ पाठान्तर-कों * अधिक पाठ है ॥ सुरतांन । पृथ्वीराज । षटू । चहुवांनं ॥ † यह रूपक
सं० १६४७ की प्रति में नहीं है ॥
६ पाठान्तर- गजनै । संपत्ते । दीए । फुरमांन । षटू । बिल्लै । सथ । भुझ । गुजर । मिल्लै ।
दूध । दी । नागौर । सजि ॥