पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 429, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ेंनवां समय ३५] पृध्वीराजरासो । ४१६
तुहिय खेत पल तिष नीर । दून परि जुद्ध जुंधिय धीर ॥
तरै सांई उप्पर अत्य । सेवक उड्ड सांई कित्ति ॥ छं० ॥ १८७ ॥
चौसठि क्रंम लोथि पथार । भर परि धरच्च लुब्भिय चार ॥
उप्पर भिरैं सामंत सूर । मत्तौ जुद्ध दून कहूर ॥ छं० ॥ १८८ ॥
ठेल्लै एक एकैं वीर । गज्जै दीन जंपै मोर ॥
चावंड राव जेट्टौ जामि । साह मघ्न गूर्जर राम ॥ छं० ॥ १८९ ॥
गो.विंद राव विक्कसिय भानु । मानौं कोपियंते काल ॥
आंवरि वीर च्यारौं वीर । धारै पग्ग दोक्कर धीर ॥ छं० ॥ २०० ॥
हक्कैं वीर जंपै बानि । जुद्दे इसं केहरि जानि ॥
चंपै मीर तुहैं भार । नँवै कमध अठ्ठ उक्कार ॥ छं० ॥ २०१ ॥
भागैं परैं के अगिवांन । वढी जैत राव चहुवांन ॥
सनै सत्तस लुत्थिय भार । परि रन मीर धीर पथार ॥ छं० ॥ २०२ ॥ रू० ॥ ८६ ॥
पृथ्वीराज के सामंतों का शहाबुद्दीन का पीछा करना ॥
कवित्त ॥ परे मरि पथ्थार । साह हंक्यौ रा * चावंड ॥
संमुहं गोरी चंपि । मनौं गज सैं गज आर्मड ॥
चंद्र सेन पुंडोर । आइ सज्ज्यौ दिसि बामं ॥
कमि सनमुष कैमास । छक्कि जद्दव राजासं ॥
पुंडीर राइ चामंड भर । गहे दून दूनों सुकर ॥
ह्वै वन्यौ जांम जद्दव उक्कार । भिल्लि चिहु चंपिय षंड सर ॥
छं० ॥ २०३ ॥ रु० ॥ ८७ ॥
८६ पाठान्तर-छंद उधोर । मंत । मदु । दून । सुभर । हरूँ । अगर । परें ॥ १८२ ॥
जुवांन । वह वह रुक्क हक्कैं हाक ॥ १८३ ॥ थरैं । उठि । तमि । झारें । पट पट्टि । दहि
॥ १८४ ॥ स॒रैं । नांम । यहै । अय्यनै । तांम । हहं । द्रष्ट । संभारि । उठें ॥ १८५ ॥ अद्भुत ।
अद्भूत । भैयांन । मचि । कंकम । क्रमांन । रंभान । उठिय । जांनि ॥ १८६ ॥ तुटिय । तरें ॥
सांईं । उप्प । ऊपर । भ्रत्त । सांइ । क्तत्त ॥ १८७ ॥ लुथि । लुभिय । भिरें । सामंत । दुनों ॥ १८८ ॥
एकै । गजै । चावंड । जांम । गुजरा । रांम ॥ १८९ ॥ गोइंद राय । गोविंदराव । गोइन्दराइ ।
विकसि । मानों । कोपीयंतो । आंवारे । धारें । धारे । बग ॥ २०० ॥ हरूँ । बांनि । इम । जांनि ।
चंपे । तुट्टै । कमंध ॥ २०१ ॥ भगे । परें । अगिवांन । जेतरा । वहुवान । सत्तै । लोथीय । लुधिय ॥ २०२ ॥
८७ पाठान्तरः-प्रथार । हक्क्यौ । * अधिक पाठ है ॥ गोरी । मनौं । क्रमि सनमुख पुंडीर ।
मंत्र जादुव राजाभं ॥ राय । राव । गहै । जांम । चंपियं ॥