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सर्वकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 420

४१० पृथ्वीराजरासो। [नवां समय २६
मीर हुसैन का कहना कि आपने हमारे लिये कष्ट उठाया है
तो हमारा सिर भी आपके लिये तयार है देखिए कैसी
लड़ाई लड़ता हूं, पृथ्वीराज का कहना कि इसमें
आश्चर्य क्या है मैं भी आज तुम्हें ग़ज़नी
का सुलतान बनाता हूं ॥
कवित्त ॥ कचै साच हुस्सेन । सुनौ चहुआन जुझु बत ॥
आज सीस तुम कज्ज । सेन साचाब भैंर्डौ पत ॥
मो कज्जै साहस । करिग प्रथिराज सरन भ्रम ॥
द्यौं उज उसू अज्ज । करौं राजन अकथ कम ॥
जंपै सु राज प्रथीराज तब । कद्य अचिन्ज जंपौ तुमह ॥
अप्पौँ सु छत्र गज्जन पुरह । सहि सेन साचाब गद्य ॥
छं० ॥ १२३ ॥ रू० ॥ ६८ ॥
मीर हुसैन का सलाम करके बाईं ओर सेना सजाना,
पृथ्वीराज का अपने सरदारों को आज्ञा देना
कि तुम लोग मीरहुसैन की सहायता
करो और सामंतों का आज्ञा
पालन करना ॥
कवित्त ॥ करि सलाम हुस्सेन । अनी बंधी दिसि बाईं ॥
सज्जरा बंधे कंठ । सहं सज्जे थन थाईं ॥
बोलि राज प्रथिराज । बीर जद्दव जामामी ॥
मच्चन सीच परिहार । सूर गुज्जर राभानी ॥
तीकंम बोलि तारंन भर । बगारीय देवद्य सुअन ॥
मँडलीक बोलि परसंग सुअ । जीचराज जंपै सुगुन ॥
छं० ॥ १२४ ॥ रू० ॥ ६९ ॥
: ६८ पाठान्तर-हुसेन । झुझ । कज । पंडो । कजै । साहस । प्रथीराज । धेमं । हौं उज उसूं
आज । करो । राजनं । अकथ्यं । अकथ्य । छंम । अप्पोँ ॥
६९ पाठान्तर-कियं । सलांम हुसेन । सजे । प्रथीराज । जांमांमी । गूजर । रामांनी ।
तिक्कंम । सगुन ॥