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पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 398, कुल 470 में से

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पृष्ठ 398

३८८ पृथ्वीराजरासो । [ नवां समय ४
पृथ्वीराज का शिकार खेलना और मीर हुसैन का
सुन्दर दास को पृथ्वीराज के पास भेजना ॥
कवित्त ॥ पारधि पहु पृथिराज । रमै षहू पुर पासह ॥
बहिल चीस चिचक्क । ससिष रेसम धर रासह ।
ह्वै कुरंग फंदेत्त । डोरि बहु बंधि विनानिय ॥
जाम एक दिन आदि । मध्य खेलै मृगयानिय ॥
आयौ बसारि हुस्सेन तहैं । सुन्यौ राज मृगया समय ।
बुलाय दास सुंदर बिखिय । पठ्यौ प्रत्ति चहुआन तय ॥
छं० ॥ ९ ॥ रू० ॥ ९ ॥
सुन्दर छाया का स्थान देख कर मीर का डेरा डालना ॥
दूहा ॥ उत्तम ठाम सु छांह जड़, करि मुकाम बलवीर ॥
बुलि डेरां विधि विधि बरन, तहां बयट्ठौ मीर ॥
छं० ॥ १० ॥ रू० ॥ १० ॥
हरम (स्त्रियों) का डेरा पीछे की ओर डाला ।
दूहा ॥ डेरा हरम सुपिठ रखि, चहु पष्यां बर मीर ॥
पासवांन कुल सील सम, पास राखि बर नीर ॥
छं० ॥ ११ ॥ रू० ॥ ११ ॥
सुन्दर दास का पृथ्वीराज के पास जाना, पृथ्वीराज
का मीर का कुशल समाचार पूछना और
उसका सब हाल कहना ॥
दूहा ॥ सुंदर दास सुपास गय, जहां राज पृथिराज ॥
मिलिय विविधि पुच्छै कुसल, कह्यौ मीर सब साज ॥
छं० ॥ १२ ॥ रू० ॥ १२ ॥
९ पाठान्तर–पारिधिरा । पृथीराज । षटूपूर । तीस । फंदैत । विनानीय । जांम मधि
हुसैन । तहां । बुलाय । सुंदरि । पिन्नौय । चहुआन । रय ॥
१० पाठान्तर–उत्तिम । ठांम । मुकांम । बर वीर । बयठौ ॥
११ पाठान्तर–पिठि । चहुं । पषां । पासवांन । शील । रखि ॥
१२ पाठान्तर–सु पास । राजन । पूंछै । पुछी ॥