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सर्वकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 371

सातवां समय ३३ ] पृथ्वीराजरासो । ३६१
दल घट्क्यौ सब सथ्य । जुद्ध धायौ तत्तंरिय ॥
चाहुआन कौ साथ । तेग तुंगह विडारिय ॥
उंच गात अरु हत्थ । वीर कही पट भारिय ॥
एइ ओपम कविचंद । चिंति मन मझ्झ विचारिय ॥
पल्लव सुवीर केतुक नवन । षरबंसंत वायद्द चल्लै ॥
तम तेज रुधिर भींज्यौ बहुल । कज्जह कित्ति जावक घुलै ॥
कूं० ॥ १६० ॥ छं० ॥ ९७ ॥
दूहा ॥ नाहर नाहर जिम निकसि । भिरि नाहर के भेष ॥
कहर कन्ह धपि कुप्पि पुठि । वली मीर चष लेष ॥
कूं० ॥ १६१ ॥ दू० ॥ ९८ ॥
कुंडलिया ॥ फिरि जुझार किय स्वामि कौं । मुक्तियं काम धमारि ॥
बली मीर गढ्ढौ लयौ । मरन सरन विचारि ॥
मरन सरन विचारि । मिलन अंतहपुर किन्नौ ॥
बँधि चिय सांइ सुभित्त । करि सांई सौं दिन्नौ ॥
सार धार तन षंड । षंडि मायौ रिपु जुर जुरि ॥
तिल तिल तन तुट्ट्यौ । रंभ ढुंढ्ढौ चित फिरि फिरि ॥
कूं० ॥ १६२ ॥ कुं० ॥ ९९ ॥
दूहा ॥ सिर तुट्टै परि भूमि पर । यौं राजै कविचंद ॥
कमल जानि नचंत सर । सरद चंद पर कंध ॥
कूं० ॥ १६३ ॥ दू० ॥ १०० ॥
कुंडलिया ॥ कमल जानि नच्यौ जु सर । दिसि सोभै संग्राम ॥
मानहु जलद कमोद तजि । थल आए ए ताम ॥
९७ पाठान्तर-सथ । तत्तारीय । चाहुवान । विडारीय । हाथ । कट्टी । भारीय । उपम ।
मन सों । विचारीय । विच्यारिय । बायह । भंज्यौ ॥
९८ पाठान्तर-नाहर कै । लेषि ॥
९९ पाठान्तर-स्वामि कों । मुक्तिय । काम । गल्लौ । शरन । विचारि । अन्तरपुर । बंधि ।
चीय । सांई । सुभित । सुभृत । तिल तिल्ल । ढंढ्यौ ॥
१०० पाठान्तर-तुट्टै । यों । राजि । राजै । जानि । नाचंत । शरद कंच ॥