पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३५२ 'पृथ्वीराजरासो । [ सातवां समय २४
कवित्त ॥ संस छड्डु रद गूढ़ । अंत बर बाज गज्ज नर ॥
भय भूअत्त असत्त । चढिय जुग्गिन तिन उप्पर ॥
डूक्क दंत गज गिद्धि । उतरि लै अंत अलुफ्भिय ॥
डूक्क कोद जुगिनीय । करन चैंचत सौं झुक्किय ॥
तिद्दि दिष्षचंद कविराज तत । अति उल्हास ओपम बढ़ि ॥
उडवत्त चंग सुचंग अँग । राज कुमारि अहानि चढ़ि ॥
छं० ॥ ११२ ॥ छ० ॥ ६६ ॥
दूहा ॥ धषलंगी धवली दिसा धवल तन चहुवान ॥
धवल दीछ संमुछ खख्यौ । जस धवल तन आनि ॥
छं० ॥ ११३ ॥ रू० ॥ ७० ॥
स्वामि रक्त रत्ते समुद्द । रत्ते नैन कहर ॥
रन रत्ते द्वव दाह सम । गुंजत गल्ह गहर ॥
छं० ॥ ११४ ॥ रू० ॥ ७१ ॥
नाहर ? से नाहरराय का लड़ना ॥
कुंडलिया ॥ नाहर सौं संमुछ खस्यौ । नाहर राहू नरिंद ॥
मंडोवर मारू बली । धनुवर भूपति दंद ॥
धनुवर भूपति दंद । सेन चहुआन ढंढोरी ॥
सुर असुरन करि मेर । मथन दरिया हिल्लोरी ॥
हथ हथ्थिन घन झंकि । धीर झुझ्यौ छकि छाचर ॥
मरदन सौं मिलि मरद । मरद बुल्ह्यौ मुख नाहर ॥
छं० ॥ ११५ ॥ रू० ॥ ७२ ॥
६६ पाठान्तर—वाजि । गज । भृत । असत । जुगिना । उपर । डक्क । उतर । अलुभिय ।
इक्क । जोगिनीय । चैंचत । सों । झुकिय । तिहिं । दिषि । तित । उपम । उडवत । चांग ।
कुंमारि । अट्टानि ॥
७० पाठान्तर—तन । तंन । चहुवांन । आंनि ॥
७१ पाठान्तर—स्वामिरत । रते । रत्ते । नैन । दते ॥
७२ · पाठान्तर—सों । नाहरराय । धनिवर । चहुआन । ठंढोरी । ठठोरी । टंटोरी ।
असुरनु । दरीया । हिलोरो । हथिन । सों ॥