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पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 306, कुल 470 में से

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पृष्ठ 306

२६६ पृथ्वीराजरासो । [ पांचवां समय १६
मनी बत्त सुसत्य मन । लै जराव को पह ॥
राजन कन्ह चष बंधवी। मनौं सिरी गज घट ॥ कूं० ॥ ८४ ॥ रु० ॥ ५६ ॥
कवित्त ॥ पाव लष परिमान । मोज किंमति ठहराइय ॥
तौल टंक इक्कीस । नयन आकार सवारिय ॥
जरिय जवाहर मद्धि । अरक उद्योत प्रकासिय ॥
दिष्टि मंडि देषंत । दुअन उर चंदर चासिय ॥
कंचन किखाव नगाथ कज्ज । पट्टी बंधिय चंद भट ॥
तिहि बेर कन्ह चहुआन चष । रूप प्रगटि अति षिचि षट ॥
कूं० ॥ ८५ ॥ रु० ॥ ५७ ॥ †
दूहा ॥ पाटी बंधिय कन्ह चष । हूह ओपम करि अषि ॥
तन सरवर जज बीर रस । ओटा बंधि सुरषि ॥ कूं० ८६ ॥ रु० ॥ ५८ ॥ †
पट्टी रात दिन बँधी रहती थी ॥
दूहा ॥ सो पट्टी निस दिन रहै । छोरि देइ द्वै ठाम ॥
कै सिज्या वामा रमत । कै कुहत संग्राम ॥ कूं० ॥ ८७ ॥ रु० ॥ ५९ ॥
करि सुचित्त चित्त कन्ह कों । प्रथीराज रस भाइ ॥
अवर सूर सामंत सब । रहे चीय सुख पाइ ॥ कूं० ॥ ८८ ॥ रु० ६० ॥
एक बाज ऐराक्क बर । हंस नाम अवनीस ॥
साजि साजि राजन रजक । कन्ह कीन वगसीस ॥ कूं० ॥ ८९ ॥ रु० ६१ ॥
जम दढ इक्क जराव जरि । एक उंच सिर पाव ॥
नर (सु*) नाचर वर कन्ह कों । कीनौँ कुँअर पसाव ॥
कूं० १०० ॥ रु० ॥ ६२ ॥
५६ पाठान्तर-मानी । सति । पट । राज हथ चष कन्ह वंधि । मनुं । सरी । घट ॥
५७ पाठान्तर-परिमांन । ठहराईय । तोल । मंधि ।
५८ पाठान्तर-अषि । रषि ॥ †ये दोनो रूपक संवत १६४७ की पुस्तक में नहीं हैं ॥
५९ पाठान्तर-निशि । सेज्या । संयाम ॥
६० पाठान्तर-चित्त । भाय । चाय । पाय ॥
६१ पाठान्तर-ए । नांम ॥
६२ पाठान्तर-शिरपाव । *अधिक पाठ है ॥ कों । कोनी । कुंअर ।