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पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 307, कुल 470 में से

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पृष्ठ 307

पांचवां समय १० ] पृथ्थीराजरासो । २६७
कान्ह चौहान की प्रशंसा ॥
कवित्त ॥ इसौ कन्ह चहुआन । जिसौ भारत्थ भीम वर ॥
इसौ कन्ह चहुआन । जिसौ द्रोनाचारज वर ॥
इसौ कन्ह चहुआन । जिसौ दससीस बीसभुज ॥
इसौ कन्ह चहुआन । जिसौ अवतार बारि सुज ॥
जुध बेर इम्म तुहै जुरिन । सिंघ तुहि लषि सिंघनिय ॥
प्रथिराज कुँअर साहाय कज । दुरजोधन अवतार जिय ॥
छं० ॥ १०१ ॥ रु० ॥ ६३ ॥
दूहा ॥ जहँ जहँ राजन काज हुअ । तहँ तहँ होइ समत्थ ॥
मेर हथ्थ बथ्थह भरै । नर नाहां नर नत्थ ॥ छं० ॥ १०२ ॥ रु० ॥ ६४ ॥
चालुक्य राजा भीम का अपने भाइयों के मारे जाने का
समाचार सुन कर बहुत दुःखी होना ॥
गाथा ॥ फुट्टिय वत्त प्रहासं । अनिलं बसिजम परिमउयं ॥
सुनियं चालुक भीमं । सारँग सुत हंत चहुआनं ॥
छं० ॥ १०३ ॥ रु० ॥ ६५ ॥
जल्लियं चालुक नाथं । अग्गि विलत्तिय उच्चर मन्नायं ॥
मुक्किय नृप नीसासं । मंनिय दुष भ्रात अप्पायं ॥
छं० ॥ १०४ ॥ रु० ॥ ६६ ॥
भीम का पृथ्वीराज से भाइयों के पलटे में लड़ाई मांगना ॥
दूहा ॥ अति दुख मन्यौ भीम चिय । लिखि कग्गद चहुआन ॥
सत्त भ्रात मेरे हते । इहै बैर अप्पांन ॥ छं० ॥ १०५ ॥ रु० ॥ ६७ ॥
६३ पाठान्तर—इसां । चहुवान । जिसो । भारथ । द्रोणाचारिज । एम । इम । सिंहनीय ।
प्रथीराज । दुर्योधन ॥
६४ पाठान्तर—जहां २ । तहां २ । होय । समय । हथ । बथह । भरैं । नृथ ॥
६५ पाठान्तर—बत । सुनीयं । सारंग । चहुवांनं ॥
६६ पाठान्तर-लग्गि । मनीय ॥
६७ पाठान्तर—कगर । चहुवांन । सात । अप्पांन ॥