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पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 295, कुल 470 में से

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पृष्ठ 295

२८४ पृथ्वीराजरासो । [ पांचवां समय ३
धम धसकि धरनि थाने सुभंग । गंञ्जिय अकास कै गचर गंग ॥
भय हूह चाक आतंक जोर । सद्द सुरन फेरि भेरीन घोर ॥ कूं० ॥ १४ ॥
उडि रेन खेन मुंदिग अकास । परि रोर खोर जहां तहां मैवास ॥
धरि रोस मुच्छ मुररंत भीम । रस बीर वक्र संक्रोध धीम ॥ कूं० ॥ १५ ॥
चंपी सु सीम अरियन सुजाम । डेरा सुदीन नृप सरित ताम ॥
जुररा सिकार तीतर बटेर । खेलंत सरित तट भइ अबेर ॥ छं० ॥ १६ ॥ *
दूचि समय ताम परतापसीह । बहु बंधु साथ अरसी अबीह ॥
ए छुते सकल बाहुर ते बेर । नय मक्कू आए खेलत अबेर ॥ छं० ॥ १७ ॥
गजराज नाम 'साछन सिंगार । सरितान मक्कू वच्छ पियै वार ॥
सुनि खोर दांन कुद्दे हँकार । जनु भूत भंति भय भीत भार ॥ कूं० ॥ १८ ॥
जमुना कि जग्गि काळी करार । सिर धुंनि मछावत दियौ डार ॥
गज एक वारि पीवंत दूरि । तिन पर सु तुहि जनुं सिंघ चूरि ॥ कूं० ॥ १८ ॥
धरि पंष पब्ब जनु धप्पि धाय । भुज पख्यौ नभ्र वद्दर समाय ॥
दिषि दुरद उनचि आवंत आन । धुनि करि सु डारि उन पीलवान ॥ छं० ॥ २० ॥
धायौ ति समुह साछन सिंगार । जनु बंध जंम उप्पर अपार ॥
कखपंत पाडू जनु पवन आडू । छल छले पब्ब जित तित बिठाइ ॥ कूं० ॥ २१ ॥
जम रूप दूझ जनु जंम दार । हथ आत बीच घेरे असार ॥
इक ओर वारि द्रह गद्दर गूझ । इक जोर जोर वर उंच कूझ ॥ कूं० ॥ २२ ॥
परताप सनंमुष पख्यौ जाइ । डारंत चाश्व असि कियौ घाइ ॥
बछि सीस परन दो हथ करार । षरबूज जांनि बिकस्यौ विफार ॥ कूं० ॥ २३ ॥
जगनाथ हंडि जनु बंटि दोइ । इह भंति कुंभ-कुंभी न होइ ॥
गज पर्यो धरनि साछन सिंगार । किन्नो अकाम परताप पार ॥ कूं० ॥ २४ ॥
थाने। गज्जिय। गग ॥ १४ ॥ रैन । संन । भिवास । मूंछ । कर्क ॥ १५ ॥ सुजांम । तांम ॥ १६ ॥ *
इस छंद की चारो तुकें सं० १६४७ की पुस्तक में नहीं हैं। तांम । परतापसिंह । बाहुरत ।
मश् । अबेरि ॥ १७ ॥ नांम । सिरतांन । द्वि । पीवंत । वारि । दांन । फुटे । छंकार । भै ॥ १८ ॥
जँगि । डारि । चूर ॥ १८ ॥ पंषय । जनुं । धपि । नभ । बद्दर । किमाय । आंनि । पीलवांन ॥ २० ॥
साहुंन । शृंगार । पाय । पब्य । बठाइ ॥ २१ ॥ जंमरूप । जंम्म । ओर । जोर ॥ २२ ॥ जाय । घाय ।
बिकस्यो ॥ २३॥ बंटिय कि दोय । कुभिय । होय । शृंगार । सिंगार । कीनौ ॥ २४ ॥ अरसिंह ।
पुंठ । देखि । सनंमुष । एहौ । शिर । पद्य । चीरि । हथ ।