पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसिरपाउ भाउ नषे सरस । को गनै द्रव्य भंडार अस ॥
सामंत सूर मुख नूर नत्थ । * * * कं० ॥ १२ ॥
अब्बूसराइ जामानि जह । चामंडराइ मन मुक्ति मह ॥
गोयंद राइ पीची प्रसंग । उर लग्गि अग्गिनह सुप्प अंग ॥ कं० ॥ १३॥
अप्पंत सूर सामंत और । खरगोस लहै पै कीस दौर ॥
ऐ सरस सब्ब सामंत सूर । तिन चढै नाम आजान नूर ॥ कं० ॥ १४ ॥
जुग्गिन पुरेस कजि अप्पि जीव । एती सबत्त छथ्यं सुदीव ॥
सिर पटा छाप लोहान होइ । लग्गे सुसरह सब पाइ लोइ ॥ कं० ॥ १५ ॥
कप्पूर चीर सागर सुनीर । सह धन्न धान जौहर सुचीर ॥
फुलेल अरगजा बहु सुगंध । कोठार आर उग्गह सुवंध ॥ कं० ॥ १६॥
कामंसु अप्पि ऐले सुक्रित्त । परधान मान करि मानमत्त ॥
रत्तौ सुस्वामि अम्मह सुसब्ब । गछि चलै स्वामि डारैं सुतब्ब ॥
कं० ॥ १७ ॥ १० ॥
लोहाना के वीरत्व का वर्णन ॥
गाथा ॥ लोहाना आजानं । वानं पर्थ भीम जुद्धानं ॥
आ अरूप सरूपं । बंकं अरं पहरं करनं ॥ कं० ॥ १८ ॥ रू० ॥ ११ ॥
दूहा ॥ लोहाना तैंवर अभंग, मुहर सब्ब सामंत ।
सांई काज सुधारना, ढंढोलन गय दंत ॥ कं० ॥ १८ ॥ रू० ॥ १२ ॥
लोहाना का पांच हज़ार सेना लेकर ओड़का के राजा
जसवान्त पर चढ़ाई करना ॥
कबित्त ॥ उंडच्छा अरि थान, कच्छ ईहां घर रत्तौ ।
नाम तास जसवंत, भग्ग राजन घर धुत्तौ ॥
लोहाना अनबोह, लीय बारत्त समर्थै ।
सज्जि सेन सामंत, कत्तह रषन जस कथ्यै ॥
११ पाठान्तर-पथु । बंकं ॥
१२ पाठान्तर-सब । ठंठोल गनय दंत ॥