पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ चोथा समय ३ ] पृथ्वीराजरासो । २०७
चंद् पंचमी अति सुअल्ल, दिय विप्र बहु दानं ।
तिथि तेरस रविवार दिन, पथ लग्गो चौहान ॥ छं० ॥ ७ ॥ रू० ॥ ७ ॥
पृथ्वीराज का प्रसन्न हो कर लोहाना को ग्वालियर, रणथम्भौर,
उड़छा आदि पांच हज़ार गांव देना ॥
कवित्त ॥ पय लग्गत चहुवान । मौज ग्वालेर सुदिन्नौ ।
रिनथंभह जड़द्दो । कछर सूरब्बर किन्नौ ॥
लोहाना आजान (वाह) * नाम थप्यै बहु छप्पै ।
सहस पंच दिय ग्राम । जैत कविचंद सुजप्पै ॥
तिधि धरिय मल्हित्त यह अप्पियै । लै पहा सीसह धरिय ।
रक्खी सुवत्त दिन तीन संच । पग्ग मग्ग अप्पी परिय ॥
छं० ॥ ८ ॥ रू० ॥ ८ ॥
आजानुबाहु का आना और पृथीराज का हाथी घोड़े आदि देना ॥
दूहा ॥ पूनम तिथि मंगल दिनह, गृह तेरिय आजान ।
आसन खंडि सु अप्प दिय, बहु आदर सनमान ॥
॥ छं० ॥ ९ ॥ रू० ९ ॥
छंद पड़ड़ी ॥ नव दून अप्पि मदझर गयंद । कज्जल सकोट उज्ज्वल अनंद ॥
सै पंच दिन्न वानी पवंग । गो अप्प सैक (वान) * ग्रहता कुरंग ॥
॥ छं० ॥ १० ॥
सै पंच दिन्न अति उंट अच्छ । कत्तार भार फज्कार कच्छ ॥
दोइ सै दिन्न दासी सुचंग । झलझंत तास द्रप्पन सुअंग ॥ छं ॥ ११ ॥
७ पाठान्तर-पंचमौ । दिये । तेरसि । लगै । चहुवान ॥
८ पाठान्तर-लगात । चहुवान । दिनौ । रिनथिंभह । उंडछा । सूरबर । किंनो । * अधिक
पाठ है । थपे । अप्पे । जंपै । लैं । रखी सरवत दिन तीन पर ॥
९ पाठान्तर-पूनिम ॥
१० पाठान्तर-अनंद्ध । सैं । * अधिक पाठ है । द्विन । अच्छ । कछ । सै नये ।
सरस । गर्नै । अस । मुपि । चालंडराय । सुक्कि । सब्ब । सुंभीर । नौंहर । सुरत्त । शहि । डोरे ॥
- पाठ उपस्थित पुस्तको में नहीं है ॥