सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 279, कुल 470 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 279

२६८ पृथ्वीराजरासो । [तीसरा समय १४
गाथा ॥ हरषि राज प्रथिराजं, कीरति कीन सूर सामंतं ।
बगसि ग्राम गजबाजं, अजानंबाह दीनयं नामं ॥ छं० ॥ ५७॥ रु० ॥ ४० ॥ *
दिल्ली किल्ली कथा का उपसंहार ॥
दूहा ॥ सुपन सुफल दिल्ही कथा, कही चंदवरदाय ।
अब अग्गे करि उच्चरौं, पिथ्य अकूँर गुन चाय ॥ छं० ॥ ५८ ॥ रू० ॥ ४१ ॥
इति श्रीकविचंदविरचिते पृथ्वीराजरासके
दिल्ली किल्ली कथा वर्णन नाम तृतीय
प्रस्ताव संपूर्णम् ॥ : :
*४० पाठान्तर-ग्रांम । बाज । अजांनं ॥
४१ पाठान्तर-दिल्लोय । वरदाय । अगैं । उचरौं । पिथ । कूँअर । गुनचार ॥