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सर्वकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 171, कुल 470 में से

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पृष्ठ 171

॥ चंद की स्त्री का कहना कि राजा को ऋण देता है तौ
गोविन्द को क्यों नहीं सुमरता ॥
दूहा ॥ चिंचनहारे हेरि चिंत । चिंचन हेरि कविंद ॥
जो रिन अप्पै राज कौ । तौ सुमरै न गुविंद ॥ छं० ॥ ७६९ ॥ रु० ॥ ४०३ ॥
भ्रम जल मन संदान करि । भ्रम जल भेष न फेरि ॥
चित्त न अप्पै चित्त कौं । चिंचनहारे हेरि ॥ छं० ॥ ७७० ॥ रु० ॥ ४०४ ॥
॥ चंद का उत्तर देना कि मैं कमलासन को देख कर अकुलाया
हूं केवल भक्ति विलंब करने वाली है ॥
दूहा ॥ कमलासन देषत थक्यो । भगत विलंबन चार ॥
क्रोध अप्प सब जग ग्रसै । ग्रसंत न लग्गै वार ॥ छं० ॥ ७७१ ॥ रु० ॥ ४०५ ॥
॥ तथा चंद का कहना कि संसार में जो कुछ और सर्वव्यापी
है वह कमलासन ही है उसी की उपमा करके
मैं पृथ्वीराज जी की कीर्त्ति वर्णन करता हूं ॥
भुजंगी ॥ वही तत्त चैलोक संसार सारं । वही तारनं सत्त भौ सिंध पारं ॥
जगत्तं अधारं निराधार वोची । वही अव्वदा संपदा नित्य सोची ॥ छं० ॥ ७७२॥
वही भेद संचं गजानंत लोयं । वही पूरनं ब्रह्म संसार भोयं ॥
नवं भक्ति कौ संव ही रूप धारी । भयौ ब्रह्म बुझ्यौ वही सिद्ध तारी ॥ ७७३ ॥
जगत्तं सुरत्तं वही है निनारं । वही वासना वासुदेवं प्रकारं ॥
वही भक्त हथ्थं नच्यौ कप्पिमानं । वही यै वही यै वही यै निधानं ॥ छं० ॥ ७७४ ॥
इकं एक अचिज्ज कीनें गुसांई । चवै चंद जो रंग गोव्यंद पाई ॥
वही की उपम्मा करै कित्ति भासैं । वही सब्ब संसार मज्झे प्रकासैं ॥ छं० ॥ ७७५ ॥
वही अंतरंगी सुरंगौ निनारं । वहै राज राजीव लोचन सारं ॥ छं०॥७७६ ॥ रु०॥४०६ ॥
४०३-४०४ पाठान्तर :- चिंचनहारे चित्त तूं । कवि चंद । ज्यौ अप्पो । अपैं । को । तौ । समरै ।
समरि । गोविन्द ॥ ३६८ ॥ मंदा करि । भैष न फैरि । चित्तन अप्पो । अपैं । को । चिंचनहारे ॥
४०५ पाठान्तर :- दैषत । क्रोध । सप्पै । यहै । लगो । लगै ॥
४०६ पाठान्तर :- तत्त । तारणं । भव । सिंधु । जगतं । सोही । ऊंही । ऊही । सरदा ।
सोही । भेद । मंत्र । गंजा मंत । लोयं । पूरन । सोयं । भोयं । नव । भांति । शव । भयौ । जगतं । सुरंतं ।
हेनि । हैनि । वासता । वास । है वं । वास हेवं । भक्ति हथ्थं । कष्यिमानं । कपिमानं । नधानं ।
वहीं यै वही यै निधानं निधानं । इकं । अकं । अंकं । अश्चिर्ज । कीनै । कीने । गुंसाइ । गुसाई ।
जौ । रंगी । गोविद । उपमा । करे । भासै । कही । सकल । मझे । प्रकासै । कहै । लोवंच ॥