पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९१६ पृथ्थीराजरासौ । [ आदि पर्व
॥ ढूँढा के दानव शरीर का मान और स्वरूप वर्णन ॥
कवित्त ॥ अंगह मान प्रमान । पंच सै हथ्थ उने कह ॥
दूह उंचैा उनमान । विनय लक्ष्किनह विवेकह ॥
हथ्थ षडग विकराल । मुख्य ज्वालंघन सहह ॥
आनळ दिन्नो राज । गयौ राषिस तन महह ॥
जोगिनियं गुफा बोधह निगम । तप आदर किन्नो सु मन ॥
साधंत पवन तप उग्र करि । इस रष्यौ उद्धार मन ॥
छं० ॥ ५८० ॥ रू० ॥ ३११ ॥
॥ ढूँढा का दिल्ली में पाषाणरूप हो जाना और स्त्रियों का
उसे पूजना ॥
कवित्त ॥ असी वरस सत तीन । गुफा किन्नों तप भारिय ॥
बैस वंस षिचिअ भ्रम । भरै जमुना जल नारिय ॥
सारँग बज्यौ वाउ । घटा बंधे जल बुट्टौ ॥
दौरी सब गृह मज्झ । रूप पाषान सु दिट्टौ ॥
मिलि नारि सबन अचरिज्ज करि । जल धोए उज्ज्वल कस्यौ ॥
साषंड धूप दीपक चरिच । सित मन सिद्धौ आवस्यौ ॥
छं० ॥ ५८१ ॥ रू० ॥ ३१२ ॥
॥ ढूँढा का अनंगपाल की सुता को वीर पुत्र होने का वर देना ॥
कवित्त ॥ दिय वीसल बरदान । कुष उपजै साचा अर ॥
बोरा रस उत्तान । जुद्ध मंडै न कोइ नर ॥
बीर जोति अवतार । भद्द जिह्वा तन भारिय ॥
नयन जोति संजोगि । 'पत्ति कुल पिता सँघारिया ॥
३११ पाठान्तर :—कहि अंग । मांन । प्रमांन । हथ । उन । लछनह । हथ । मुष । प्रानल ।
दीनौ । जो गिनीय । कीनौ । पंवच । रक्ष्यौ ॥
३१२ पाठान्तर :—अशी । बरस । शत । कीनौ । भारीय । पत्री अधम । वित्तीय अधम ।
वित्तिय अधम । भरे । जमना । भारीय । नारीय । सारंग । बज्यौ । वज्या । वाय । वधे । बुठौ ।
दोरी । मन्झ । सुदिट्ठौ । दीठौ । अरिज । धोय । उजल । संन मनि सुधि आवस्यौ । तन मन
सुधि आवस्यौ ॥
३१३ पाठान्तर :—दीय । वीशल । वरदांनि । कुष । कुष्य । उपजे । महा । रस । उत्तांन ।