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प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa

महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा

DevanagariHindipublished296 पृष्ठ

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पृष्ठ 98

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अन्वय—अस्मासु किञ्चित् वक्तवयम् ; विशिष्टः प्रतिपाल्यते । अयं
प्रतिषेधः किं कृतः, नियमप्रभविष्णुता । (६)
अन्वय—एते ते असुरपुरवधे दैवतानाम् अभिसरीम् गच्छन्ति । एते ते
सपुरजनपदाः स्वसुकृतैः शक्रलोके गच्छन्ति । एते ते कृत्स्नाम् वसुमतीम् स्वभु-
जबलजिताम् प्राप्नुवन्तः (सन्ति) । एते ते छन्द मृगयता मृत्युना चिरम् अनव-
सिताः । (६)
हिन्दी अर्थ
भरत—तब तक किस जगह विश्राम करूँ । ठीक' है, देख लिया । वृक्षों के
मध्य दिखने वाले इस मन्दिर में थोड़ी देर तक आराम करूँगा । इस
प्रकार देवदर्शन और विश्राम दोनो काम हो जायेगे । और नगर के
समीप थोडी देर बैठ कर फिर उसमे प्रवेश करना चाहिए, इस प्रकार
शिष्टाचार का भी पालन हो जाएगा । अतः रथ को रोको ।
सूत—जैसी दीर्घायु की आज्ञा । (रथ ठहराता है)
भरत—(रथ से उतरकर) सूत, घोडो को एक ओर ले जाकर आराम
कराओ ।
सूत—जो आज्ञा । (निकल जाता है)
भरत—(कुछ चलकर और देखकर) यहाँ तो विधिवत् खील और फूल के
नैवेद्य दिए गए है । दीवारो की पुताई के ऊपर चन्दन से पाँचो अंगु-
लियों की छापें लगाई गई है । दरवाजो पर फूलो की मालाएँ लटक
रहीं है । बाहर रेत बिछी है । क्या कोई त्यौहार है, जिसकी यह
विशेषता है अथवा प्रतिदिन का नियम पालन है । यह कौन से देवता
का स्थान हो सकता है । यहाँ शस्त्र, ध्वजा आदि बाहरी चिह्न भी
तो नही दीख पड़ते । ठीक है, अन्दर जाकर ज्ञात करूँगा ।
(प्रवेश करके और देखकर)
अहा, पत्थर की कारीगरी कितनी अच्छी है । मूर्तियो मे भावव्यंजना
सजीव प्रतीत होती है । ये प्रतिमाएँ देवताओ की होकर भी मनुष्यो
के समान जान पडती है । क्या यह चार देवताओ की मूर्तियो का
समूह है ? अथवा जो कुछ भी होवे । मुझे तो इन्हे देखकर अपार
आनन्द हो रहा है ।