प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa
महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा
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शब्दार्थ-लङ्घिते = आरूढ होने पर । स्कन्धोच्चारण = कंधो तक ऊंचा उठा
कर । नम्यमानवदन = घड़ो के मुख को झुका कर । प्रच्योतितोये = जल को
गिराने पर । विसर्जिते = विदा करने पर । विस्मितः = आश्चर्यचकित ।
विस्मयः-आश्चर्य । अपनीतभारोच्छ्वसितम् = बोझ के उतर जाने से हल्का ।
दिष्ट्या = सौभाग्य से (यह शब्द अव्यय है) । मैथिलीम् = सीता को । आस्यते =
बैठी हुई हो । अलीक = मिथ्या । दारिका = लडकी । अवगच्छामि = समझता
हूं । कौतूहलम् = उत्सुकता को । प्रकृतिजन = प्रजा के प्रमुख लोग । बाल्या-
भ्यस्त = शैशव से परिचित । अङ्कम् आरोप्य = गोद मे बैठा कर । मातृ-
गोत्र = माता के नाम से अर्थात् कौसल्यानन्दन कह कर । स्निग्धं = प्रेमपूर्वक ।
आभाष्य = बोलकर । प्रतिगृह्यताम् = स्वीकार करो । तदानीम् = तब । आर्य-
पुत्रेण = पतिदेव के द्वारा । तर्कयसि = अनुमान करती हो । अभणित्वा =
नही बोल कर । पादमूलयोः = दोनो पात्नो पर । सुष्ठु = ठीक । तुल्यशीलानि =
समान स्वभाव वाले । द्वन्द्वानि = स्त्री-पुरुषो के युगल । सृज्यन्ते = बनाए जाते
हैं । समम् = एक साथ । वाष्पेण = आसुओ से । क्लेदितौ = गीले हो गए ।
अन्वय-पटहे आरब्धे, गुरुजने स्थिते भद्रासने लङ्घिते, घटे स्कन्धो-
च्चारणनम्यमानवदनप्रच्योतितोये, राज्ञा आहूय, विसर्जिते मयि, जनः मे धैर्येण
विस्मय । भो., यदि स्वः पुत्र. पितुः वचः कुरुते, तत्र कः विस्मय. । (५)
अन्वय-समम्, तस्य बाष्पेण ममोपरि पतता, मम अधः पतता, मम
शिरः क्लेदितम्, मे पितुः पादौ क्लेदितौ च । (६)
हिन्दी अर्थ
(राम का प्रवेश)
राम-ओह,
बाजे बजने लगे थे । गुरुजन वहाँ पर उपस्थित थे । मै सिहासन पर
समासीन था । तीर्थों के जल से भरे हुए मगल कलशो को उठाकर
मेरा अभिषेक किया जा रहा था । इतना हो जाने पर भी महाराजा ने
मुझे बुलाकर बिदा कर दिया । इस स्थिति मे मेरी दृढ़ता पर लोग
आश्चर्य मे हो गए । किन्तु अपना पुत्र यदि पिता की आज्ञा को पालता
है, तो इसमे आश्चर्य की क्या बात है ? (५)
"पुत्र, इस समय राज्याभिषेक को रहने दो" इस प्रकार स्वयं महाराजा
से बिदा प्राप्त कर, अपने भार का उतरा समझ कर मेरा मन छुटकारे