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प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa

महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा

DevanagariHindipublished296 पृष्ठ

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एक ग्रंथ मत के, अनुसार प्राचीन समय मे गोत्र के नाम पर व्यक्ति के
नामकरण की प्रथा प्रचलित थी। पतंजलि, यौगन्धरायण, काश्यप आदि नाम
गोत्र के आधार पर ही प्रयुक्त हैं। अगस्त्य गोत्र की हेमीदक शाखा में "भाष"
गोत्र है। इसी गोत्र मे नाटककार भास का जन्म हुआ था। क्योकि भाष गोत्र
का अपभ्रंश रूप भास है। अतएव भास नाम गोत्र के नाम के आधार पर
प्रचलित हुआ है। भास जाति के ब्राह्मण थे और वर्णाश्रम धर्म के पोषक
थे। यज्ञ के प्रति इनकी अपूर्व आस्था अभिव्यक्त होती है।
कृतियों के आधार पर—पुसालकर महोदय का विचार है कि स्वप्न-
वासवदत्तम् और अविमारक रूपको के मंगलाचरण मे प्रयुक्त "त्वाम्" और
"ते" पद से यह ध्वनित होता है कि भास शासक नृपति थे। वे उन रूपको
के प्रथम अभिनय में स्वय सम्मिलित रहे होंगे, और उन्होंने उपस्थित
सामाजिकों के लिए आशीर्वाद के रूप मे "त्वाम्" और 'ते" पदों का उपयोग
किया होगा। प्रस्तुत सन्दर्भों मे त्वम् और ते पद का प्रयोग कवि की उपस्थिति
के साथ उसके प्रशासक होने का भी सूचक है।
प्रतिज्ञा, पंचरात्र और प्रतिमा रूपकों के मंगलाचरण मे कवि राजा
की उपस्थिति को निश्चित रूप से प्रतिपादित नहीं करता। वह सामाजिकों
के कल्याण का आशीर्वाद "वः पातु" पद द्वारा प्रदान करता है। अतः इन
रूपकों के मंगल श्लोकों से भास किसी राजसभा में निवास करने वाला राज-
कवि सिद्ध होता है।
भास की वैदिक क्रियाकांड के प्रति अपार आस्था है। वह धर्मभीरू,
सकल शास्त्रों का ज्ञाता, विनोत, प्रत्युत्पन्नमति, हास्यप्रिय, शिष्ट, गुरुजनों का
आज्ञाकारी एव कुशल भाषणकर्ता सिद्ध होता है। चाटुकारिता से रहित
स्पष्टवादी और राष्ट्रकवि के रूप में भास को माना जा सकता है।
भास की रचनाओं से यह स्पष्ट सिद्ध होता है कि कवि मे देशभक्ति
कूट-कूट कर भरी है। इसी कारण विदेशी राजा के विनाश तथा एकच्छत्र
राज्य की वह कामना करता है। नाटकों के अन्तरंग परीक्षण से भास का
राष्ट्रप्रेम भी झलकता है। प्रतिज्ञा यौगन्धरायण नाटक में कर्मठ तथा सफल
मंत्री का अपने स्वामी के मंगल हेतु प्रतिज्ञा करना और उस कठोर
व्रत का तत्परता एव बुद्धिमता से पालन करना मंत्रियो के लिए आदर्श का