प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa
महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवस्तु है। मंत्रित्व के इतने सफल अंकन से 'भास' के किसी 'राजा के यहाँ मन्त्री'
होने की सूचना मिलती है। ऐसा ज्ञात होता है कि वे परम राजभक्त मंत्री थे
और किन्हीं कारणों से उनका देश निर्वासन किया गया था अथवा उन्हें स्वयं शत्रु
या किसी विदेशी राजा के यहाँ जाकर, रहना पड़ा हो और दक्षिण में उन्होंने
शरण ली हो। दक्षिण में इनकी कृतियों की प्राप्ति का भी यही कारण है।
भास मनुष्य स्वभाव और प्रकृति के पारखी हैं। इनकी रचनाओं से
यह संकेतित होता है कि इनका कौटुम्बिक जीवन सुखी था। ये कर्त्तव्यपरायण
पुत्र, निष्ठावान् पति एवं सन्तानप्रिय पिता थे। अविभक्त परिवार के प्रति
इनकी अपार आस्था थी। ये आशावादी व्यक्ति थे। न्याय व स्वतन्त्रता के
प्रेमी थे। राजकुलों से सम्बन्ध रहने के कारण राजप्रासाद तथा अन्तःपुरों के
सजीव चित्रण में विशेष रुचि प्रदर्शित की गई है। अमात्य, सेना, दूत, युद्ध
आदि के चित्रणों से भी यह सिद्ध होता है कि भास का सम्बन्ध किसी राज-
कुल से अवश्य था।
भास का जन्म स्थान
प्रायः संस्कृत के समस्त मूर्धन्य कवियों एवं नाटककारों के जन्मस्थान
और जन्मकाल के सम्बन्ध में ऐतिहासिक सामग्री का अभाव है। भास ने
अपने जन्म से भारत के किस भूभाग को अलंकृत किया था, यह निश्चित रूप
से नहीं कहा जा सकता है।
दक्षिणी भारत—भास के रूपकों की उपलब्धि केरल में होने से कुछ
इन्हें दाक्षिणात्य स्वीकार करते हैं। किन्तु भास ने उत्तर भारत के देश, नगर,
नदी, वन, पर्वत आदि का जैसा चित्रण किया है, वैसा दक्षिण का नहीं।
इनका दक्षिण भारत का ज्ञान रामायण और महाभारत के ज्ञान तक ही
सीमित है। रामायण की कथावस्तु को ग्रहण करने पर भी इन्होंने रामेश्वरम्
जैसे प्रसिद्ध तीर्थ का उल्लेख नहीं किया। अतः भौगोलिक निर्देशों के आधार
पर भास को दक्षिण का निवासी नहीं माना जा सकता। संभव है अपने
'उत्तरार्द्ध' जीवन में ये दक्षिण के प्रवासी रहे हों। सामाजिक दृष्टि से भी भास
द्वारा निरूपित रीति-रिवाज एवं प्रथायें उत्तर भारत की ही हैं।
उज्जयिनी—अभिलेखों से ज्ञात होता है कि यह नगरी ई० पू० 400
वर्ष के लगभग प्रसिद्ध हो चुकी थी। उपनिषदों, ब्राह्मण ग्रन्थों व पुराणों में
भी उज्जयिनी की प्रसिद्धि मानी गई है। भारतीय साहित्य में जिन सोलह