प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa
महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसप्तमोऽङ्कः [ २१५
व्याकरण—सम्बन्धिभिश्चमित्रैश्च = सम्बन्धमित्रैः । मिद्यति स्निह्यति =
√ मिद् + त्र = मित्र । अथवा, मिनोति मानं करोति = √ मि + क्त्र = मित्र ।
अनु + √ गम् + यक् + शानच् = अनुगम्यमान ।
नगरे निवसति = नगर + अण् = नागर । उदये स्थितम् = उदय + स्था +
क = उदयस्थः ।
अलङ्कार—उपमा । चन्द्र उपमान, राम उपमेय, उदयस्थ होना साधारण
धर्म और इव उपमावाचक हैं । पूर्णोपमा है ।
छन्दः—इन्द्रवज्रा ।
टिप्पणी—
अधिगतराज्यः—अधिगतं राज्यं येन स । अधि + √ गम् + क्त = अधिगत ।
राम को प्रसन्नता है कि उनका कार्य पूरा हो गया है और उन्होंने राज्य प्राप्त कर
लिया है ।
धन्या खल्वस्मि—राम के वनवास के कारण कैकेयी का बहुत अपयश था ।
अब राम के राज्याभिषेक से वह परिमार्जित हो गया है । इसलिये वह अपने को
धन्य समझ रही है । वह चाहती है कि इस बात को अयोध्यावासी भी देख लें,
जिससे वे उसकी निन्दा न करें ।
स्मृतमात्रमुपगच्छति—पुष्पक विमान की विशेषता बताई गई है कि वह
इच्छामात्र से संचालित होता था । वह स्मरणमात्र से ही समय पर उपस्थित हो
जाता था ।
(भरतवाक्यम्)
यथा रामश्च जानक्या बन्धुभिश्च समागतः ।
तथा लक्ष्म्या समायुक्तो राजा भूमिं प्रशास्तु नः ॥१५॥
(निष्क्रान्ताः सर्वे)
[अन्वयः—यथा रामः जानक्या च बन्धुभिः च समागतः, तथा लक्ष्म्या समा-
युक्तः नः राजा भूमिं प्रशास्तु ॥१५॥]
हिन्दी रूपान्तर—
अर्थ [श्लोक १५]—जिस प्रकार कि राम का सीता और बन्धुओं के साथ
मिलन हुआ था और उन्होंने पृथ्वी का शासन किया था, उसी प्रकार राज्यलक्ष्मी
से युक्त हमारे राजा (राजसिंह) भूमि का शासन करें ॥१५॥
(सब अभिनेता रंगमंच से बाहर निकल जाते हैं)
संस्कृत व्याख्या—यथा येन प्रकारेण रामः दशरथस्य ज्येष्ठपुत्रः जानक्या