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प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa

महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा

DevanagariHindipublished296 पृष्ठ

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पृष्ठ 258

१६४ ] प्रतिमानाटकम्
(प्रवेश करके)
प्रतिहारी—कुमार की जय हो । इस वृत्तान्त को सुनकर बड़ी स्वामिनी
कौसल्या मूच्छित हो गई हैं ।
कैकेयी—हैं ?
भरत—क्या कहा, माता मूर्च्छित हो गई हैं ?
कैकेयी—पुत्र ! आओ । आर्या को आश्वासित करें ।
भरत—माता का जैसा आदेश है ।
(सब निकल जाते हैं)
टिप्पणी—
आर्यस्य साहाय्यार्थम्—कैकेयी का स्पष्टीकरण होने के बाद भरत तुरन्त ही
राम की सहायता के लिये जाना चाहते हैं और इसके लिये माता कैकेयी से अनुमति
मांगते हैं ।
ज्येष्ठभट्टिनी—ज्येष्ठा चासौ भट्टिनी । बड़ी रानी कौसल्या ।
॥ इति षष्ठोऽङ्कः ॥
॥ छटा अंक पूरा हुआ ॥
इति भासविरचितप्रतिमानाटके डा० कृष्णकुमारकृत व्याख्यायाः
षष्ठोऽङ्कः समाप्तः