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प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa

महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा

DevanagariHindipublished296 पृष्ठ

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पृष्ठ 192

१२८ ] प्रतिमानाटकम्
इह स्थास्यामि देहेन तत्र स्थास्यामि कर्मणा ।
नाम्नैव भवतो राज्यं कृतरक्षं भविष्यति ॥१६॥
[अन्वयः—इह देहेन स्थास्यामि, तत्र कर्मणा स्थास्यामि। भवतः राज्यं
नाम्ना एव कृतरक्षं भविष्यति ॥१६॥]
हिन्दी रूपान्तर—
सीता—रोते हुये आर्यपुत्र को तात फिर भी रुला रहे हैं ।
राम—सीते ! यह मैं अपने आपको सम्भाल रहा हूँ । वत्स लक्ष्मण !
जल लाओ।
लक्ष्मण—आर्य जो आदेश देते हैं ।
भरत—आर्य ! यह न्यायोचित नहीं है । क्रम के अनुसार मैं सेवा करूंगा ।
मैं ही जाऊंगा । (कलश को लेकर, निकल कर, प्रवेश करके) ये जल हैं ।
राम—(आचमन करके) सीते ! लक्ष्मण का काम तो छूटा जा रहा है ।
सीता—आर्यपुत्र ! निश्चय से इनको भी सेवा करनी चाहिये ।
राम—ठीक है। तो यहाँ तो लक्ष्मण सेवा करे। वहाँ अयोध्या में स्थित
होने पर मेरी सेवा भरत करे ।
भरत—आप मुझ पर प्रसन्न होवें ।
अर्थ [श्लोक १६]—यहाँ वन में मैं शरीर से स्थित रहूँगा और वहाँ अयोध्या
में कर्म से स्थित रहूँगा । आपके राज्य की रक्षा तो आपके नाम से ही हो जायगी ।
भरत के कहने का अभिप्राय यह है कि वे वन में ही निवास करेंगे और राम की
सेवा करेंगे । परन्तु अयोध्या के राज्य की रक्षा की चिन्ता सदा करते रहेंगे ॥१६॥
संस्कृत-व्याख्या—इह अस्मिन् वने एव अहं देहेन शरीरेण स्थास्यामि निव-
सिष्यामि । नाहमयोध्यां निवर्त्य गमिष्यामि, वन एव मे निवासो भविष्यत्यर्थः । तत्र
अयोध्यायां राजधान्यां तु कर्मणा राज्यपालन रूपकर्तव्यकर्मणा स्थास्यामि, शरीरेण
इहस्थोऽप्यहं राज्यरक्षात्मककर्तव्यं सम्पादयिष्यामि। भवतः राज्यं नाम्ना भवतः
नाममात्रश्रवणेन एव कृतरक्षं कृता विहिता रक्षा यस्य तादृशं सुरक्षितं भविष्यति ।
भवतः नाममात्रं श्रुत्वैव न कस्यचिदप्यत्रोपद्रवकरणसाहसं भविष्यति ॥१६॥
व्याकरण—कृता रक्षा यस्य तादृशम् = कृतरक्षम् ।
छन्दः—अनुष्टुप् ।
न्याय्यम्—न्यायस्ययोग्यम् = न्याय = ण्यत् = न्याय्य । भरत को कवि ने
लक्ष्मण से छोटा वर्णित किया है । सबसे छोटे का अधिकार सबकी सेवा करने का
होता है । भरत छोटे हैं, अतः लक्ष्मण को जल लाने के लिये उद्यत देखकर स्वयं
जल लाने का प्रस्ताव करते हैं ।