प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa
महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा
पृष्ठ 163, कुल 296 में से
संदर्भ में पढ़ें(184)
तापस-- नन्दिलक, कुलपति ने कहा है कि अपनी स्त्री का अपहरण करने
वाले, तीनो लोको को व्याकुल करने वाले रावण को मारकर, राक्षसी
आचरण के विरुद्ध, अनेक गुणो से मण्डित विभीषण का अभिषेक
करके, देवताओं और ऋषियो के सम्मुख अपने पवित्रचरित्र को
प्रमाणित करने वाली देवी सीता को लेकर, भालू, वानरो और
राक्षसों के प्रमुख व्यक्तियो से घिरे हुए श्री राम यहाँ आए हुए
है, जो शरद् ऋतु के स्वच्छ आकाश के चन्द्रमा के समान सुशोभित
हो रहे है। आज इस तपोवन मे अरण्य सुलभ भोग-वैभव के अनुसार
उनका स्वागत करने के लिए जो अभीष्ट है, वह सब सज्जित करके
रखा जाए।
नन्दिलक--आर्य, सब कुछ तैयार है। किन्तु,
तापस--यह क्या ?
नन्दिलक--यहाँ विभीषण के साथ अन्य राक्षस भी है। उनके खाने के
सम्बन्ध में कुलपति ही जानें।
तापस--किसलिए ?
नन्दिलक--वे तो मांस भी खाते है।
तापस--अरे, मत घबराओ। वे राक्षस तो विभीषण के वश में रहने
वाले है।
नन्दिलक--तो ऐसे सज्जन राक्षस को नमस्कार। (निकल जाता है)
तापस--(देख कर) अरे, ये तो श्रीमान् राम है। जो-
"हे मनुष्यो मे श्रेष्ठ, आपकी जय हो। आप अपने दूसरे शत्रुओ पर
भी विजय प्राप्त करें। यह पृथ्वी एकच्छत्र वाली होकर
आपके अधीन हो" इस प्रकार प्रसन्न बने बहुत से मुनियो द्वारा
प्रशंसित होकर राजा राम पुष्पक- विमान से पृथ्वी तल पर
उतर गए है। (१)