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प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa

महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा

DevanagariHindipublished296 पृष्ठ

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पृष्ठ 114

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पैदल चलने वाला । भार्यया सह = सीता के साथ । आज्ञप्तः = आज्ञा प्राप्त
करके लिया गया है । उदाहृतम् = कहा गया है । देशकाले = उचित स्थान
और अवसर पर । अयशसि = अपयश मे । लोभः = आकर्षण । कीर्तयित्वा =
कह कर या नाम लेकर । किमु = क्या । नृपफलतर्षः = राजभाव से प्राप्त
भोग्य वस्तु की तृष्णा । दद्यात् = प्रदान की । नृपतिमाता = राजा की जननी ।
इष्टः = अभिलषित । भवति = हे देवी । आर्यः = राम । कष्ट = बहुत बुरा
पाप । { राज्यैषिण्या = राज्य की कामुक बनी । असुभिः = प्राणो से । गणितः
–श्राप } । प्रेषितवती = भेजा । शीर्णम् = टूटा । वल्कलवतीम् = वल्कलवस्त्र
–धारण करने वाली को । धात्रा = विधाता के द्वारा । सृष्ट = बनाया गया है ।
वज्रकठिनम् = इन्द्र के आयुध वज्र के समान कठोर । प्रकृतिभिः = मन्त्री आदि
अधिकारियों के साथ । पुरस्कृत्य = आगे करके । प्रत्युद्गतौ = सम्मान करते
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