प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa
महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा
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सुनता। स्थैर्यम्=स्थिरता को। अनवशेषम्=सम्पूर्ण रूप से। अभिधीयताम्=
कहा जाए। अभिषिच्यमाने=राज्य की धुरी पर नियोजित करते हुए। शुल्क-
दोष=विवाह के मूल्य रूपी अनर्थ को। स्मृत्वा=याद करके। भवतु=होवे।
मम सुतः=मेरा पुत्र भरत। अभिहितं=कहा। धैर्येण=धैर्यपूर्वक। आश्वसत्या=
साहस प्राप्त होने पर। व्रज = जाओ। सुत=हे पुत्र राम। बद्धचीर=वल्कल
वस्त्र पहने हुए को। निधनम्=मृत्यु को। असदृशं=आरोग्य अर्थात् बिना अवसर
के। पात्यन्ते = गिराए जा रहे हैं। धिक्प्रलापाः=धिक्कार के वाक्य। ननु=
सचमुच मे। मयि=मुझ पर। सदृशाः= समुचित। शेषाः= जननी कैकेयी की
भर्त्सना से बचे हुए। प्रकृतिभिः=प्रजाजनों के द्वारा। मोहम् उपगतः=संज्ञाहीन
हो जाता है। उत्सरत=हटो। आर्याः=सज्जनो। काले=उचित समय पर।
देव्यः= कौशल्या आदि रानियां। उपागते=प्राप्त होने पर। अजलस्य=जलरहित
प्यासे व्यक्ति के लिए। जलाञ्जलिः=जल की अंजलि। इतः इतः=इधर से आइए
इधर से। भवत्यः=आप देवियां। प्रतिमानृपस्य=प्रतिमा रूप से बने राजाओं का
नः=हमारे। समुच्छ्रयः= उन्नत। हर्म्यदुर्लभः=राज सदन से भी बढ़कर।
अयन्त्रितैः=बिना रोके जाने वाले। अप्रतिहारिकागतैः=द्वारपाल की अनुमति के
बिना आने वाले। विना प्रणामं=प्रणाम रहित। पथिकैः=मुसाफिरों द्वारा।
उपास्यते=उपयोग में लिया जाता है। वयःस्थः=युवा। इव=समान। पार्थिवः=
राजा = दशरथ। परशङ्काम्=किसी पराए की आशंका को। अलं कर्तुम्=
मत करो। गृह्यताम्=ग्रहण करो। अन्वास्यमानः=पीछा किए जाते हुए।
चिरजीवदोषैः=दीर्घजीवी पुरुष मे आसानी से प्राप्त होने वाले दूषणों के द्वारा।
कृतघ्नभावेन=किए हुए के उपकार को न मानने की भावना के द्वारा।
विडम्ब्यमानः=हँसी उड़ाया गया। विपन्ने=मर जाने पर। जीवामि=जी रहा
हूँ। सूतः=सारथि।
अन्वय-पित्रा भ्रात्रा च वर्जिताम् अटवीभूताम् अयोध्याम् क्षीणतोयाम्
नदीम् इव पिपासार्तः अनुधावामि। (१०)
अन्वय—तं शुल्कदोषं स्मृत्वा मम सुतः राजा भवतु इति तया अभि-
हितम्। तत् धैर्येण आश्वसन्त्या सुतं वनं व्रज इति आर्यः अपि अभिहितः।
तं बद्धचीरं दृष्ट्वा राजा असदृशं निधनं गतः ननु, प्रकृतिभिः शेषाः सदृशाः
धिक् प्रलापाः ननु मयि पात्यन्ते। (११)