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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 83, कुल 318 में से

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पृष्ठ 83

५४ प्राचीनलिपिमाला.
१समनस माहूरखितास अंतेवासिस वलौपुत्रस सावकास
उत्तरदासकस पसादो तोरणं. २अधिछत्राया राज्ञो शोन-
कायनिपुत्रस्य वंगपालस्य पुत्रस्य रजे(ज्ञो) तेवणीपुत्रस्य
भागवतस्य पुत्रेण वैहिदरीपुत्रेण अ(आ)षाढसेनेन कारितं.
लिपिपत्र छठा.
यह लिपिपत्र कुशनवंशी राजाओं के समय के मथुरा१, सारनाथ२ और चारगांव३ से मिले हुए लेखों
से तय्यार किया गया है. मथुरा के कई एक लेखों से अक्षर छांटे गये हैं, जिनमें कई अक्षरों के एक से अधिक
रूप मिलते हैं जो भिन्न भिन्न लेखकों की लेखन रुचि की भिन्नता प्रकट करते हैं. पहिली 'इ' में तीन
बिंदियों के स्थान पर तीन आड़ी रेखाएं बना दी हैं और दूसरी 'इ' में दो आड़ी लकीरों के आगे दाहिनी
ओर एक खड़ी लकीर बनाई है. 'उ' (पहिले) की दाहिनी ओर की आड़ी लकीर को नीचे की तरफ़
मोड़ा है. यही मोड़ बढ़ने पर नागरी का 'उ' बनता है (देखो, लिपिपत्र