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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 56, कुल 318 में से

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पृष्ठ 56

ब्राह्मी से निकली हुई ई. स. की पांचवीं और छठी शताब्दी की गुप्त और तेलुगु-कनड़ी लिपियों के बीच
पाई जाती है, परंतु उन दोनों (ब्राह्मी और खरोष्ठी) में एक भी अक्षर की समानता का न होना भी
यही सिद्ध करता है कि ये दोनों लिपियां एक ही मूल लिपि से सर्वथा नहीं निकलीं १, अर्थात् खरोष्ठी
सेमिटिक से निकली हुई है और ब्राह्मी सेमिटिक से नहीं.
फिनिशियन लिपि से ब्राह्मी लिपि की उत्पत्ति मानने का सिद्धान्त कहां तक प्रामाणिक और
स्वीकार करने योग्य है इसका विचार यहां तक किया गया. अब वूलर के इस दूसरे कथन की समीक्षा
आवश्यक है कि 'ब्राह्मी लिपि पहिले दाहिनी ओर से बाईं ओर लिखी जाती थी.'
वूलर को फिनिशियन लिपि से ब्राह्मी की उत्पत्ति सिद्ध करने के यत्न में कितने एक अक्षरों
का रुख बदलने की आवश्यकता थी. ई. स. १८६१ में जनरल कनिंगहाम ने 'कॉइन्स ऑफ एन्श्यंट्
इंडिया' नामक भारतवर्ष के प्राचीन सिक्कों के विषय का एक पुस्तक प्रकट किया जिसमें एरण २ से
मिले हुए कई एक तांबे के सिक्के भी छापे. उनमें से एक पर का ब्राह्मी लिपि का लेख 'धमपालस' ३
दाहिनी ओर से बाईं ओर को पढ़ा जाता है. इस उलटे लेख के तिनके के सहारे को वूलर ने बड़े
महत्व का माना और इसीके आधार पर अपनी 'ब्राह्मी लिपि की उत्पत्ति' विषयक पुस्तक में लिखा
कि 'सेमिटिक से ब्राह्मी लिपि की उत्पत्ति सिद्ध करने के प्रमाणों की श्रृंखला को पूर्ण करने के लिये
जिस कड़ी की त्रुटि थी वह वास्तव में यही है' ४; तथा उस सिक्के को ई. स. पूर्व ३५० के आस पास
का मान कर यह सिद्धांत कर लिया कि 'उस समय ब्राह्मी लिपि दाहिनी ओर से बाईं ओर तथा
बाईं ओर से दाहिनी ओर (दोनों तरह) लिखी जाती थी' ५.
इस कल्पना का मुख्य आधार एरण का सिक्का ही है, क्योंकि अब तक कोई शिलालेख इस
देश में ऐसा नहीं मिला कि जिसमें ब्राह्मी लिपि फारसी की नांई उलटी लिखी हुई मिली हो ६. किसी
सिक्के पर लेख का उलटा आ जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि सिक्के पर उभरे हुए अक्षर
सीधे आने के लिये सिक्के के ठप्पे में अक्षर उलटे खोदने पड़ते हैं अर्थात् जो लिपियां बाईं ओर से दाहिनी
ओर (जैसे कि ब्राह्मी और उससे निकली हुई सब लिपियां और अंगरेज़ी भी) लिखी जाती हैं उनके
ठप्पों में सिक्के की इबारत की पंक्ति का आरंभ दाहिनी ओर से करके प्रत्येक अक्षर उलटा खोदना
पड़ता है, परंतु यदि खोदनेवाला इसमें चूक जाय और ठप्पे पर बाईं ओर से खोदने लग जाय तो
सिक्के पर सारा लेख उलटा आ जाता है, जैसा कि एरण के सिक्के पर पाया जाता है. यदि वह एक
१. ई. स. १८६४ में मैंने 'प्राचीनलिपिमाला' का प्रथम संस्करण छापा, जिसकी एक प्रति डॉ. वूलर को भेंट की.
उसकी पहुंच स्वीकार करने के साथ डॉ. वूलर ने लिखा 'कि तुम ब्राह्मी लिपि को भारतवासियों की निर्माण की हुई स्वतंत्र लिपि
मानते हो यह ठीक नहीं. ब्राह्मी लिपि सेमिटिक लिपि से निकली हुई है.' इसके उत्तर में मैंने लिखा कि 'यदि ब्राह्मी
और खरोष्ठी दोनों लिपियां एक ही मूल लिपि की शाखें हैं तो ७०० वर्ष के भीतर ही उनमें परस्पर एक भी अक्षर की
समानता न रही इसका क्या कारण है सो आप कृपा कर सूचित कीजिये.' परंतु इसका कुछ भी उत्तर वे न दे सके और न
अब भी कोई दे सकता है.
२. मध्य प्रदेश के सागर ज़िले का एक प्राचीन नगर. ३. क; कॉ. ए. इं; पृ. १०१; प्लेट ११, संख्या १८.
४. वू; इं. स्ट; संख्या ३, पृ. ३ (ई. स. १८६५). ५. वू; इं. स्ट; संख्या ३, पृ. ४३.
६. वूलर ने लिखा है कि 'अशोक के लेखों में दाहिनी ओर से बाईं ओर लिखने के चिह्न बहुत कम मिलते हैं.
जौगड़ और धौली के लेखों में 'ओ' उलटा है; और जौगड़ तथा देहली के सिवालिक स्तंभ के लेख में 'ध' कचित् उलटा
मिलता है' (वू; इं. पे; पृ. ६), परंतु ये तो मामूली लेखकों के हस्तदोष या देशभेद के तुच्छ अंतर हैं. क्योंकि 'ओ'
की आकृति, एक खड़ी लकीर के ऊपर के छोर से बाईं ओर को और नीचे के छोर से दाहिनी ओर को एक एक आड़ी लकी-
र खींचने से, बनती है. यह संभव है कि असावधान लेखक पहिले खड़ी लकीर खींच कर आड़ी लकीरें खींचने में ग़लती
कर जावे. 'ध' की आकृति धनुष के सदृश होने के कारण उसकी प्रत्यंचा चाहे दाहिनी तरफ रहे या बाईं तरफ इसमें मा-
मूली अनपढ़ लेखक शायद ही फ़र्क माने. देशभेद से भी कभी कभी किसी अक्षर की आकृति उलटी लिखी मिलती है जैसे
कि ई. स. की छठी शताब्दी के यशोधर्मन् के लेख में 'उ' नागरी के 'उ' का सा है (देखो लिपिपत्र १८ वां) परंतु उसी
शताब्दी के गार्लुलक सिंहादित्य के दानपत्र में उससे उलटा है (लिपिपत्र ३८ वां). वर्तमान बंगला लिपि का 'ख' उलट,