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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 318 में से

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पृष्ठ 48

ब्राह्मी लिपि की उत्पत्ति. १६
यूनानी लिपि से लिये गये हैं, और यह मिश्रण ई. स. पूर्व ३२५ के आस पास (अर्थात् सिकंदर के
इस देश में आने के बाद) हुआ माना जाता है.'
कस्ट १ का मानना है कि एशिया के पश्चिम में रहने वाले फिनिशियन् लोग ई. स. पूर्व की
आठवीं शताब्दी में लिखना जानते थे और उनका वाणिज्यसंबंध इस देश (हिन्दुस्तान) के साथ
रहने तथा उन्हींके अक्षरों से ग्रीक, रोमन तथा सेमेटिक भाषाओं के अक्षर बनने से अनुमान होता है
कि ब्राह्मी लिपि भी फिनिशियन् लिपि से बनी होगी.
सर् विलियम जोन्स १ ने सेमेटिक से ब्राह्मी की उत्पत्ति होना अनुमान किया, जिसका कॉप २
तथा लेप्सिअस २ ने अनुमोदन किया. फिर वेबर ३ ने सेमेटिक और ब्राह्मी अक्षरों के बीच कुछ स-
मानता दिखला कर उसी मत को पुष्ट किया जिसको बेनफ़ी ४, पॉट् ४, वेस्टरगार्ड ४, मैक्समूलर ४, फ्रेडरिख
मूलर ४, साइस् ४, व्हिट्नी ४ आदि विद्वानों ने थोड़े बहुत संदेह के साथ स्वीकार किया.
स्टिवन्सन ५ का अनुमान है कि ब्राह्मी लिपि या तो फिनिशियन् लिपि से बनी हो या मिसर के
अक्षरों से.
पॉल गोल्डस्मिथ ६ का मानना है कि फिनिशियन् अक्षरों से सिलोन (सिंहलद्वीप, लंका) के
अक्षर बने और उनसे भारतवर्ष के; परंतु ई. मूलर ७ का कथन है कि सीलोन में लिखने का प्रचार
होने के पहिले भारतवर्ष में लिखने का प्रचार था.
बर्नेल ८ का मत यह है कि फिनिशियन् से निकले हुए अरमइक अक्षरों से ब्राह्मी अक्षर बने,
परंतु आइजक टेलर ९ लिखता है कि अरमइक और ब्राह्मी अक्षर परस्पर नहीं मिलते.
लेनोर्मेट १० कहता है कि फिनिशियन् अक्षरों से अरब के हिमिअरैटिक अक्षर बने और उनसे
ब्राह्मी.
डीके ११ का मत यह है कि ब्राह्मी लिपि असीरिआ १२ की 'क्युनिफॉर्म' १३ लिपि से किसी प्राचीन
दक्षिणी १४ सेमिटिक लिपि के द्वारा, जिससे हिमिअरैटिक लिपि निकली, बनी है.
आइजक टेलर लिखता है कि 'ब्राह्मी लिपि किसी अज्ञात दक्षिणी सेमिटिक लिपि से निकली
होगी. वास्तव में वह किस लिपि से निकली यह अब तक मालूम नहीं हुआ परंतु ओमन १५ या हड्रॅमाँट १६
या ओर्मज् १७ आदि के खंडहरों में उस (मूललिपि) का पता एक न एक दिन लगना संभव है.'
ऐडवर्ड क्लॉड १८ लिखता है कि फिनिशियन् से सेबियन् (हिमिअरैटिक) लिपि निकली और
उससे ब्राह्मी.
१. ज. रॉ. ए. सो; जिल्द १६, पृ ३२६, ३५६. २. इं. ऍ; जि. ३५ पृ. २५३. ३. Indische Skizzen, p. 225-250.
४. इं. ऍ; जि. ३५, पृ. २५३. ५. ज. बॉ. ब्रॅ. रॉ. ए. सो; जि. ३, पृ. ७५. ६. ऍकेडेमी; ई. स. १८७७ ता. ६ जनवरी.
७. मू; रि. ए. इं. सी; पृ. २४. ८. ब; सा. इं. पे; पृ. ६. ९. टे; आ; जि. २, पृ. ३१२.
१०. ऍस्से ऑन फिनिशियन् आल्फ़ावेद; जि. १, पृ. १५०.
११. Zeitschrift der Deutschen Morgenlandischen Gessellschaft, Band, XXXI, 398 f.
१२. असीरिआ के लिये देखो पृ. १, टि. ३.
१३. यूरोपियन् विद्वानों ने 'क्युनिफॉर्म' उस लिपि का नाम रक्खा है जिसके अक्षर तीर के फल की आकृति के कई
चिह्नों को मिलाने से बनते हैं. इस बहुत प्राचीन और विचित्र लिपि के लेख असीरिआ, बाबीलन् तथा ईरान आदि में
मिलते हैं. ईरान के प्रसिद्ध बादशाह दारा ने अपना वृत्तान्त इसी लिपि में (तीन भाषाओं में) बेहिस्तान नामक स्थान के
चट्टान पर खुदवाया था.
१४. फिनिशियन् लिपि से निकली हुई लिपियों में से हिमिअरैटिक (सेबियन्), इथिओपिक्, कूफ़ी और अरबी आदि
दक्षिणी, और अरमइक, सीरिअक और चाल्डिअन् उत्तरी सेमिटिक लिपियां कहलाती हैं.
१५. अरब के एक प्रदेश का नाम जिसका प्रधान नगर मस्कत है.
१६. अरब के दक्षिण तट पर का एक इलाका जो ओमन से पश्चिम की तरफ है.
१७. ईरान के समुद्र तट पर का एक प्राचीन शहर.
१८. स्टोरी ऑफ दी आलफ़ाबेट; पृ. २०७.